राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा (रीट) गुरुवार को दो पारियों में सम्पन्न हुई, जिसमें परीक्षा के दौरान कड़ी सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे।
राजसमंद: राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा (रीट) गुरुवार को दो पारियों में सम्पन्न हुई, जिसमें परीक्षा के दौरान कड़ी सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। पहले और दूसरे सत्र के दौरान उम्मीदवारों को विभिन्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जिनमें आभूषण उतरवाने से लेकर जूते तक उतारने तक की प्रक्रिया शामिल थी। इन सुरक्षा उपायों के बावजूद परीक्षा के दोनों सत्रों में उच्च उपस्थिति रही, जिसमें पहली पारी में 84.94% और दूसरी पारी में 91.45% उपस्थिति दर्ज की गई।
परीक्षा के केन्द्रों पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद पुख्ता थी। उम्मीदवारों को परीक्षा केन्द्र में प्रवेश से पहले आभूषण उतारने के आदेश दिए गए, वहीं कई उम्मीदवारों को जूते उतारने के लिए कहा गया। इसके अलावा, कुछ केन्द्रों पर जो उम्मीदवार एक या दो मिनट भी देर से पहुंचे, उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया, भले ही उन्होंने प्रशासन से अपनी स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश की हो। इस बार पहली बार बायोमेट्रिक प्रणाली से उम्मीदवारों की एंट्री ली गई थी।
परीक्षा के दौरान, केन्द्रों के बाहर अभिभावकों की भीड़ देखने को मिली, जो अपने बच्चों के परीक्षा समाप्त होने का इंतजार कर रहे थे। अधिकांश अभिभावक फुटपाथ या आसपास की चाय की दुकानों पर बैठकर समय बिता रहे थे, और छोटे बच्चों की देखभाल भी कर रहे थे।
परीक्षा के चलते यात्री भार में बढ़ोतरी के कारण, राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम ने अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की थी। कांकरोली बस स्टैंड पर सामान्य से 25 से 35 प्रतिशत अधिक यात्री भार देखा गया, जिससे यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।
रीट परीक्षा के दो स्तर थे: कक्षा 1 से 5 के लिए लेवल-1 और कक्षा 6 से 8 के लिए लेवल-2। इस परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान नहीं था। हर प्रश्न के लिए 5 विकल्प दिए गए थे, जिनमें से एक सही उत्तर था। अगर उम्मीदवार किसी प्रश्न का उत्तर छोड़ते थे, तो उन्हें पांचवे विकल्प के रूप में "अनुत्तरित प्रश्न" का चुनाव करना था। साथ ही, यदि 15 से अधिक प्रश्न अनुत्तरित छोड़ दिए गए, तो उम्मीदवार को परीक्षा से बाहर किया जा सकता था।
परीक्षा में उम्मीदवारों को पात्रता प्राप्त करने के लिए विभिन्न वर्गों के अनुसार न्यूनतम अंक लाने थे। सामान्य वर्ग के लिए 60%, जनजाति वर्ग के लिए 36% तक अंक लाना अनिवार्य था। अन्य वर्गों के लिए यह प्रतिशत अलग-अलग था। परीक्षा का प्रमाण पत्र आजीवन मान्य रहेगा।