जांचों के लिए मरीजों को काटने पड़ते हैं चक्कर: किराए के साथ समय की हो रही बर्बादी
अश्वनी प्रतापसिंह @ राजसमंद. जिले का टीबी युनिट जिला अस्पताल से करीब ५ किमी दूर होने से मरीजों को खासी परेशानी हो रही है। कभी मरीज को जांच के लिए टीबी युनिट से आरके अस्पताल जाना पड़ता है, तो कभी आरके अस्पताल से टीबी युनिट के चक्कर काटने पड़ते हैं। दोनों अस्पतालों के मध्य परिवहन की अच्छी सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों का खासा समय बर्बाद करना पड़ता है, निशुल्क उपचार की सुविधा होने के बावजूद काफी राशि किराए के रूप में खर्च करनी पड़ती है। जिससे मरीजों को खासी समस्या हो रही है।
केस एक
बदला हुआ नाम राकेश कुमार ने बताया कि उसे लम्बे समय से खासी आ रही थी, इस पर वह जांच के लिए राजकीय आरके चिकित्सालय गया, यहां चिकित्सक ने उसे टीबी जांच केंद्र के लिए रैफर कर दिया। इस पर उसे पांच किमी दूर जांच केलिए कमला नेहरू चिकित्सालय आना पड़ा।
केस दो
मोहनी बाई (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उसे लम्बे समय से खासी-बुखार आदि की समस्या थी, इस पर उसने कमला नेहरू चिकित्सालय के बगल में स्थित टीबी अस्पताल में जांच करवाई, यहां जांच के बाद चिकित्सक द्वारा अन्य जांचे लिख दी गईं, इस पर उसे जांचों के लिए राजकीय आरके चिकित्सालय आना पड़ा, जिससे उसके १०० रुपए किराए में लग गए और चिकित्सालय लेट पहुंचने से उसकी जांच भी नहीं हो पाई, जिससे उसे दूसरे दिन पुन: जांच के लिए आना पड़ा।
युनिट यहां, बेड वहां
टीबी की जिला युनिट कमला नेहरू चिकित्सालय में संचालित है। जबकि रजिस्ट्रेशन वाले मरीजों को भर्ती करने के लिए ४ बेड का वार्ड राजकीय आरके जिला चिकित्सालय में मिला हुआ है। ऐसे में मरीज व उनके परिजनों को आवागमन की खासी असुविधा होती है।
यहां पीएचसी में बनी है जिला युनिट
टीबी मरीजों को युनिट के पास ही सभी प्रकार की चिकित्सकीय सेवा उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश की अधिकतर युनिटें आरके जिला चिकित्सालय के पास ही बनाई जाती हैं ताकि मरीजों को जांच व अन्य दवाओं के लिए इधर- उधर भटकना नहीं पड़े लेकिन राजसमंद में जिले की टीबी युनिट कांकरोली के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पास मौजूद है, जिससे यहां आए मरीजों को प्राथमिक स्तर की ही सुविधाएं मुहैया हो पाती हैं और मरीज जांच आदि के लिए भटकते रहते हैं।
मरीजों की संख्या भी कम
कमला नेहरू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन का औसत आउट डोर 200 मरीजों के आस-पास रहता है, जबकि राजकीय जिला चिकित्सालय का आउट डोर औसत 900 रहता है। ऐसे में टीबी के मरीज भी पीएचसी की तुलना में जिला अस्पताल में ज्यादा जाते हैं।
मैंने अभी चार्ज लिया है...
मैंने अभी चार्ज संभाला है, जगह की कमी तो है, पर अभीतक मेरे सामने ऐसी समस्या नहीं आई। मुझे मालूम हुआ है कि पूर्व में इसे स्थानांतरित करने की बात चली थी, अब प्रक्रिया कहां पर अटकी है, यह मुझे नहीं पता।
डॉ. रामनिवास जाट, प्राभारी, टीबी युनिट, राजसमंद