यूपी के रामपुर में एक पंचायत ने फिल्मी अंदाज में फैसला सुनाया है, जिससे महज 5 महीने पहले बसा घर उजड़ गया है। एक युवक की 5 महीने पहले ही शादी हुई थी, लेकिन नवविवाहिता ने प्रेमी से मिलना जारी रखा। मामला पंचायत में पहुंचा तो नवविवाहिता को प्रेमी को सौंपने का फरमान सुना दिया गया।
यूपी के रामपुर जिले की एक पंचायत ने फिल्मी अंदाज में एक ऐसा फरमान सुनाया है, जिससे महज पांच महीने पहले बसा घर उजड़ गया है। पंचायत में शुक्रवार को हुआ यह फैसला आसपास के क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। बताया जा रहा है कि युवक की 5 महीने पहले ही शादी हुई थी, लेकिन नवविवाहिता ने प्रेमी से मिलना जारी रखा। इसके बाद विवाद बढ़ा तो मामला पंचायत में जा पहुंचा। इसके बाद पंचायत ने दोनों पक्षों को बुलाकर उनकी बात सुनी और फैसला लिया कि नवविवाहिता को प्रेमी को ही सौंप दिया जाए। इसके बाद पति ने पत्नी को शादी के बंधन से मुक्त करते हुए उसके प्रेमी को सौंप दिया। युवती बसा बसाया घर परिवार छोड़कर प्रेमी के साथ चली गई।
दरअसल, फिल्मी तर्ज पर प्रेम त्रिकोण का यह अनोखा मामला रामपुर जिले के अजीमनगर थाना क्षेत्र का है। युवती की शादी पांच महीने पहले ही परिवार वालों की रजामंदी से पड़ोसी युवक के साथ हुई थी। जबकि शादी से पहले ही युवती का दूसरे युवक के साथ अफेयर था। युवती प्रेमी के साथ शादी करना चाहती थी, लेकिन परिजन इसके लिए राजी नहीं थे। उन्होंने युवती की मर्जी के खिलाफ उसकी दूसरी जगह शादी कर दी, लेकिन युवती ने प्रेमी से छिप-छिपकर मिलती रही। पति को इसकी जानकारी मिली तो उसने बहुत समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ी रही और प्रेमी से मिलना जारी रखा। इतना ही नहीं वह पांच दिन पहले प्रेमी के घर तक पहुंच गई। प्रेमी के अलावा घर में कोई नहीं था। इसका पता चलते ही पति भी गांव के लोगों को लेकर मौके पर पहुंच गया और दोनों को पकड़ लिया गया। इसके बाद मौके पर जमकर हंगामा भी हुआ।
कई पंचायत करने के बाद लिया फैसला
हंगामे के बाद गांव के मौजिज लोगों ने मामले को निपटाने की कोशिश शुरू कर दी। इस मामले में कई बार पंचायतें हुई। वहीं, शुक्रवार को पंचायत में सभी ने युवती को फिर समझाया, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ी रही। आखिरकार पति और पंचायत ने युवती की जिद के आगे हार मान ली और उसे प्रेमी को सौंपने का फरमान सुना दिया।
पुलिस के संज्ञान में भी पहुंचा मामला
थाना प्रभारी राहुल गंगवार का कहना है कि इस मामले कोई लिखित सूचना प्राप्त नहीं हुई है। घटना उनके संज्ञान में है। दोनों पक्षों ने आपसी समझौता किया है।