
Jauhar University Public Road:रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ जिला प्रशासन और रामपुर विकास प्राधिकरण ने मिलकर बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। अब यूनिवर्सिटी परिसर में हुए कथित अवैध निर्माण को लेकर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन को एक नया नोटिस थमाया है। इस कार्रवाई के साथ ही परिसर के आसपास अचानक प्रशासनिक हलचल भी बढ़ गई है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन पर परिसर के भीतर बिना अनुमति और गैर कानूनी तरीके से निर्माण कार्य कराने का आरोप लगा है। इसी सिलसिले में रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारी खुद जौहर यूनिवर्सिटी परिसर पहुंचे और वहां मौजूद जिम्मेदार अधिकारियों को आधिकारिक नोटिस थमाया। सूत्रों के मुताबिक प्राधिकरण की ओर से दिए गए इस नोटिस में यूनिवर्सिटी परिसर में किए गए कथित अवैध निर्माण को लेकर जवाब मांगा गया है।
यह पूरा विवाद यूनिवर्सिटी परिसर के भीतर मौजूद सार्वजनिक सड़क और लोक निर्माण विभाग (PWD) बोर्ड से भी जुड़ा हुआ है। आरोप है कि सार्वजनिक रास्ते और सरकारी जमीन पर बिना किसी वैध अनुमति के अवैध कब्जा करके निर्माण कार्य करा लिया गया है। इसी शिकायत को आधार बनाकर रामपुर विकास प्राधिकरण के आला अधिकारी खुद मौके पर पहुंचे और यूनिवर्सिटी प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
बता दें कि इससे पहले जौहर यूनिवर्सिटी परिसर के अंदर की सड़क को PWD ने सार्वजनिक मार्ग घोषित करते हुए बोर्ड भी लगाया। बोर्ड में साफ लिखा है कि विश्वविद्यालय परिसर के अंदर से गुजरने वाली यह सड़क आम लोगों के आवागमन के लिए सार्वजनिक मार्ग है।
प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2024 से यह क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में शामिल है। प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है जिसके तहत उन्हें अपने स्तर पर सभी अवैध निर्माणों को हटाना होगा। प्रशासन की ओर से चेतावनी दी गई है कि यदि इस निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं की गई तो रामपुर विकास प्राधिकरण भारी पुलिस बल के सहयोग से खुद इन सभी 38 अवैध भवनों को जमींदोज करने की बड़ी कार्रवाई शुरू कर देगा।
जौहर यूनिवर्सिटी लंबे समय से भूमि और निर्माण से जुड़े विभिन्न कानूनी मामलों के कारण सुर्खियों में रही है। अब परिसर के भीतर की सड़क को सार्वजनिक मार्ग घोषित किए जाने को भी उसी क्रम की एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई माना जा रहा है। फिलहाल इस पूरे मामले पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया और संबंधित विभागों की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा। प्रशासन का कहना है कि सभी कार्रवाई लागू नियमों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर की जा रही है। वहीं, मामले से जुड़े सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर भी दिया जा रहा है।