
रांची। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रही उम्मे हबीबा ने बिगड़ती सेहत के बीच राज्य सरकार से मार्मिक अपील की है। उन्होंने कहा कि मेरी तबीयत लगातार बिगड़ रही है, लेकिन छात्रों के न्याय और अधिकार की लड़ाई से पीछे हटने का सवाल नहीं है। भूख हड़ताल के 14वें दिन अनशन पर बैठी हबीबा ने मुख्यमंत्री से भावुक अपील करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री, मैं आपसे टकराव नहीं, संवाद चाहती हूं।
उन्होंने कहा कि तबीयत लगातार बिगड़ रही है, लेकिन झारखंड के युवाओं के भविष्य और न्याय की उम्मीद ने उन्हें अब तक मजबूती दी है। हबीबा ने मुख्यमंत्री से अपील की कि छात्रों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाए और बातचीत के माध्यम से इस संघर्ष का समाधान निकाला जाए। उन्होंने कहा कि मैं अपने लिए नहीं, झारखंड के लाखों बेटे-बेटियों के भविष्य के लिए लड़ रही हूं। उनकी अपील ऐसे समय सामने आई है, जब जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के आंदोलन को 24 दिन पूरे हो चुके हैं और सरकार तथा छात्रों के बीच गतिरोध खत्म करने के लिए वार्ता प्रस्तावित है।
आंदोलनकारी अभ्यर्थी वर्ष 2024 में हुई जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने और जेपीएससी-जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। पूर्व में सरकार और छात्रों के बीच हुई बातचीत में परीक्षा सुधार से जुड़ी कई मांगों पर सहमति बनी थी। सरकार ने 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा और बैकलॉग सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की घोषणा भी की है। हालांकि, सीजीएल परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग पर अब तक सहमति नहीं बन सकी है। इससे पहले अनशन के 13वें दिन हबीबा ने कहा था कि लगातार कमजोर हो रहे शरीर के बीच उन्हें खुद नहीं पता कि वह इस संघर्ष को कितने समय तक जारी रख पाएंगी।
उन्होंने साफ कहा था कि शारीरिक कमजोरी उनके हौसले को नहीं तोड़ सकी है। उन्होंने 23 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों पर सरकार से गंभीरता से ध्यान देने और उनके अधिकारों की रक्षा करने की अपील की थी। हबीबा ने कहा था कि मुख्यमंत्री की ओर से ठोस आश्वासन मिलने पर वह अनशन समाप्त करने पर विचार कर सकती हैं। उन्होंने राहुल गांधी से भी रांची पहुंचकर आंदोलनरत छात्रों और अस्पताल में भर्ती अनशनकारियों से मुलाकात करने की अपील की थी। हबीबा का कहना था कि झारखंड में कांग्रेस गठबंधन सरकार का हिस्सा है, ऐसे में छात्रों की मांगों को लेकर पार्टी की भी जिम्मेदारी बनती है।