
(पत्रिका ब्यूरो,रांची): भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अंत्येष्टि के बाद नई दिल्ली से वापस रांची लौटने पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शनिवार को बड़ी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने रांची हवाईअड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अलग झारखंड राज्य गठन के लिए प्रदेश की सवा तीन करोड़ जनता अटलजी के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहेगी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी को खुद के लिए प्रेरणा स्रोत बताया और कहा कि उनके विचारों में अटल जी का आदर्श हमेशा साथ रहेगा। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि झारखंड में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में स्मारक का निर्माण कराया जाएगा, इसके अलावा अटलजी के नाम से कुछ नई योजनाएं भी शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्मारक बनने से आने वाली पीढ़ी को भी अटलजी के व्यक्तित्व और आदर्शां के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
इधर, झारखंड की कई प्रमुख नदियों में भी अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियां विसर्जित करने की तैयारी चल रही है।इन नदियों में अटलजी की अस्थियां विसर्जित के पीछे मकसद है कि ये नदियां जहां से भी होकर गुजरेगी, वहां के लोग अटल जी के साथ एक जुड़ाव महसूस करेंगे। मुख्यमंत्री के बताया कि झारखंड के बड़ी नदियों में अटल जी की अस्थियां विसर्जित की जाएगी। उन्होंने कहा कि अस्थियों को झारखंड की नदियों में प्रवाहित किया जाएगा। इसके लिए अस्थि विसर्जन का कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम ने कहा कि झारखंड की चार से पांच बड़ी नदियों में अटल जी की अस्थियों को विसर्जित किया जाएगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भाजपा शीर्ष नेतृत्व द्वारा अस्थि कलश यात्रा को लेकर सहमति दी जा चुकी है, अस्थियों को दिल्ली से झारखंड लाने के बाद उनकी अस्थि कलश यात्रा भी निकाली जाएगी। बताया गया है कि जहां-जहां से अस्थि कलश यात्रा निकलेगी,वहां लोग उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। अस्थि कलश यात्रा की तैयारी को लेकर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने नई दिल्ली में शुक्रवार को ही मंत्रियों और प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की, इस बैठक में अस्थि कलश
यात्रा की संभावित मार्ग पर चर्चा हुई। बताया गया है कि कलश यात्रा का मार्ग इस तरह से तय किया जाएगा,ताकि राज्य के सभी प्रमंडलों में यात्रा पहुंचे और वहां पार्टी के लोग अटलजी को श्रद्धांजलि दे पाएं। पार्टी की ओर से अस्थि कलश यात्रा के माध्यम से इन अस्थियों को साहेबगंज जिले में गंगा नद के अलावा स्वर्णरेखा, दामोदर, खरकई, कोयल और शंख समेत अन्य प्रमुख नदियों में प्रवाहित की जाएगी।