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झारखंड में भी बढ़ रही सीफूड की मांग

राजधानी में कुछ वर्ष पहले तक सीफूड के नाम पर मुख्य रूप से लोग झींगा मछली को ही जानते थे, लेकिन अब शहर में सीफूड की कई नई वैरायटी भी बाजार में आसानी से उपलब्ध है...

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(पत्रिका ब्यूरो,रांची): झारखंड की राजधानी रांची समेत अन्य शहरों में सीफूड की मांग बढ़ रही है। हालांकि सावन के महीने में कई परिवार मांसाहारी भोजन का त्याग कर देते है, लेकिन साल भर मांस-मछली खाने वाले लोगों की रूचि सीफूड की विभिन्न वैरायटी की ओर बढ़ रही है।

राजधानी में कुछ वर्ष पहले तक सीफूड के नाम पर मुख्य रूप से लोग झींगा मछली को ही जानते थे, लेकिन अब शहर में सीफूड की कई नई वैरायटी भी बाजार में आसानी से उपलब्ध है। राजधानीवासियों को सीफूड की एसी-वैसी वैरायटी भी अब आसानी से मिल रही है, जिनके बारे में काफी लोगों को अब तक जानकारी नहीं है। पहले लोगों का मानना था कि सीफूड मुख्य रूप से मुंबई, चेन्नई और केरल जैसी जगहों पर ही मिल सकता है, लेकिन अब समुद्र तट से सैकड़ों किलोमीटर दूर रांची समेत अन्य प्रमुख शहरों के बाजारों में भी सीफूड की विभिन्न वैरायटी भी उपलब्ध है।


मछलियों और अन्य समुद्री खाद्य उत्पादों में काफी वैरायटी भारत के समुद्री तटों पर उपलब्ध है। मांस -मछली व्यवसायियों का कहना है कि कुछ वर्ष पहले तक लोग सिर्फ मटन, चिकन या मछली ही खाते थे, लेकिन जब से लोगों को सीफूड के बारे में जानकारी मिली है और लोगों ने इसका स्वाद चखा है, तब से मटन, चिकन और मछली की बजाय अब सीफूड खाना ज्यादा पंसद करने लगे है, क्योंकि सीफूड में जो विटामिन और मिनरल्स होते है, वह मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होते है। लोगों को स्वादिष्ट भोजन के साथ-साथ अच्छा पौष्टिक आहार भी सीफूड में मिल रहा है।


सीफूड के व्यवसायी बंद डिब्बों में बेहतर पैकेंजिंग के साथ उपभोक्ताओं तक इसे पहुंचा रहे हैं। चिकन,मटन या अन्य मछली की भांति सीफूड की कीमत में भी कोई खास ज्यादा अंतर नहीं है, इस कारण भी लोगों के लिए यह आकर्षण का केंद्र बन रहा है।