
रतलाम. रतलाम. यह खबर आपकी आत्मा का झंकझोर देगी, मानसिक अस्वस्थता से जूझ रहे 30 वर्षीय युवक गोविन्द को नौ माह बाद जब पिता ने देखा तो आंसू छलक आए, क्योंकि उसने रतलाम के अपना घर आश्रम में नई जिंदगी को पाया, अब उसने पढ़ाई पूरी करने का संकल्प किया।
युवक ने मुस्कुराते हुए कहा कि वह घर जाकर अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी करेगा, फिर काम ढूंढ़ेगा और अपना ध्यान रखेगा। उसने कहा कि आश्रम ने उसे नया जीवन दिया है। बेटे को स्वस्थ देख वृद्ध पिता की आंखें नम हो गईं। "नर सेवा ही नारायण सेवा है" इस मूलमंत्र को चरितार्थ करते हुए 'अपना घर आश्रम' रतलाम ने एक बार फिर मानवता की एक ऐसी अनुपम मिसाल पेश की है, जिसने न केवल एक बिखरे हुए परिवार को समेटा है, बल्कि एक युवा को नई जिंदगी भी दी है।
सेवा प्रदाताओं और परिजन भावुक
आश्रम ने मानवता की एक मिसाल पेश करते हुए 30 वर्षीय युवक गोविन्द को नौ माह बाद उसके परिवार से मिलाया। 4 जुलाई को, आश्रम में उपचाराधीन गोविन्द को उसके वृद्ध पिता के साथ गृह जिले के लिए विदा किया गया। यह क्षण आश्रम के सेवा प्रदाताओं और परिजनों के लिए भावुक रहा। परिवार ने आश्रम प्रबंधन और सेवा प्रदाताओं का आभार मानते हुए कहा कि जब उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी, तब अपना घर आश्रम उनके लिए सहारा बनकर सामने आया।
गोविन्द के चेहरे पर आत्मविश्वास
नौ माह पूर्व गोविन्द को जब आश्रम लाया गया था, तब वह मानसिक अवसाद और शारीरिक पीड़ा से जूझ रहा था। वह अपनों से बिछड़ चुका था और उसकी स्थिति दयनीय थी। आश्रम में समर्पित डॉक्टरों, काउंसलर्स और सेवा साथियों की दिन-रात की देखभाल से गोविन्द के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ। विदाई के समय गोविन्द के चेहरे पर आत्मविश्वास और खुशी स्पष्ट दिख रही थी।
आश्रम में आश्रय-भोजन-चिकित्सा सुविधा
अपना घर आश्रम देशभर में लावारिस, बीमार और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को आश्रय, भोजन, वस्त्र और चिकित्सा सुविधा मुफ्त प्रदान करता है। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों को स्वस्थ कर उनके परिवारों से मिलाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोडऩा है। आश्रम ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी बेसहारा व्यक्ति को देखें तो आश्रम को सूचित करें।