
रतलाम. चांदनीचौक से बाजना बस स्टैंड की लक्कड़पीठा रोड एक बार फिर सूर्खियों में आ गई है। सालभर बाद भी सडक़ का काम पूरा नहीं होने से आक्रोशित इस क्षेत्र के व्यापारियों ने बुधवार को नाले की नई पुलिया पर चक्काजाम कर दिया। महापौर प्रहलाद पटेल उनसे चर्चा करने पहुंचे तो लोगों ने घेराव कर दिया। उन्हें घेरकर जवाब मांगा कि अब तक काम क्यों नहीं हुआ। हम रोज धूल में जी रहे हैं। एक दिन आप यहां बैठकर देख लो तो पता चल जाएगा।
58 दिन में बना दूंगा
इसी बीच महापौर पटेल ने निगम आयुक्त अनिल भाना को भी मौके पर बुला लिया। उनसे मौके पर ही महापौर पटेल ने पूछा कितने दिन में यह सडक़ बना दोगे। इस पर निगम आयुक्त भाना ने कहा 58 दिन में पूरा कर देंगे। महापौर का दूसरा सवाल था कि नहीं बनी तो क्या? इस पर भाना ने कहा कि मैं नौकरी छोड़ दंगा। बाद में पत्रकारों से चर्चा में भी महापौर पटेल ने इस बात का उल्लेख किया और कहा देखते हैं कितने दिन में बनाते हैं।
महापौर ने कहा मुर्दों की निगम
महापौर पटेल ने व्यापारियों से चर्चा में यहां तक कह दिया कि यह मुर्दों की नगर निगम है। फाइलें महीनों तक पड़ी रहती है। मैं बुलाता हूं तो काम आगे बढ़ता है। उन्होंने इस बात को बाद में प्रेस से चर्चा में स्वीकार भी किया कि अधिकारी-कर्मचारी बहुत सुस्त है और इसका फायदा ठेकेदार उठा रहे हैं।
रेट बढ़े तो नाटक, कम होते तो क्या?
महापौर पटेल ने सडक़ निर्माण में ठेकेदार की भी गलती मानी और चेताया कि उसकी फाइल ऐसी कर देंगे कि भविष्य में वह ठेकेदार नगर निगम में ठेकेदारी ही नहीं कर पाएगा। खाड़ी युद्ध के दौरान डामर के भाव बढ़ गए हैं। यदि कम हो जाते तो क्या ठेकेदार नगर निगम से कम राशि लेता। उन्होंने इतने साल काम करके कमाया ही है। यदि किसी काम में घाटा जाता है तो भी उन्हें काम करना ही पड़ेगा। भवे ही भुगतना भी पड़े।
महापौर और आयुक्त मुर्दाबाद के नारे
महापौर पटेल के पहुंचने से पहले निगम आयुक्त भाना मौके पर पहुंचे थे। तब व्यापारियों ने जमकर नारेबाजी की। उन्होंने महापौर और निगम आयुक्त मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। जद्दोजहद के बीच निगम आयुक्त ने उन्हें 58 दिन में काम पूरा करने का लिखित में दे दिया। इस पर व्यापारियों ने कहा कि लेटर पेड पर लिखित में दो तो माने। इसके बाद निगम आयुक्त वहां नहीं रुके और अपने वाहन से वहां से निकल गए थे।
हमें दे दो राशि, हम बना देंगे
महापौर और व्यापारियों के बीच घेराव के दौरान चर्चा में व्यापारियों ने दो टूक कहा कि एक साल से फोरलेन सडक़ नहीं बन पाई है। इतने में तो कोई भी बना देता। व्यापारियों ने दो टूक कहा कि यदि ठेकेदार सडक़ नहीं बना रहा है तो निर्माण की राशि हमें दे दी जाए, हम खुद सडक़ बना लेंगे। इस दौरान बीच-बीच में हंगामा होता रहा। महापौर ने व्यापारियों को समझाइश देने का प्रयास किया, लेकिन व्यापारी ठोस आश्वासन पर अड़े रहे।
दोपहर बाद पहुंचे पत्र लेकर
व्यापारी गोपाल राठी, विनोद पिरोदिया, दीपक खिमेसरा, नुरुद्दीन सहित बड़ी संख्या में व्यापारी आंदोलन में शामिल हुए। ज्यादातर ने अपना व्यवसाय बंद रखा और धरना, चक्काजाम में शामिल हुए। दोपहर में महापौर के आश्वासन के बाद शाम को कर्मचारी वहां लिखित में लेकर पहुंचे। इसके बाद चक्काजाम समाप्त कर व्यापारी लौटे।