चार माह से वेतन लंबित, रतलाम ग्रामीण सैलाना, बाजना, रावटी, पिपलौदा, ताल, आलोट, जावरा, बिलपांक आदि स्थानों से 800 से अधिक आशा कार्यकर्ता और सुपरवाइजर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। मानदेय समय पर नहीं मिलने के कारण कई कार्यकर्ताओं की स्थिति कमजोर हैं।
रतलाम। ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने वाली आशा कार्यकर्ता और सुपरवाइजर चार माह से लंबित वेतन भुगतान न होने की मांग को लेकर पांच दिन से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
मांगों का निराकरण न होने पर 16 मई से ग्रामीण क्षेत्र की कार्यकर्ता और सुपरवाइजर गुलाब चक्कर पर बैठकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। इससे पहले, 15 मई को कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से प्रशासन को अवगत कराया था, लेकिन कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई।
मांगों पर कोई सुनवाई नहीं की
आशा कार्यकर्ता एवं आशा सहयोगिनी महासंघ जिलाध्यक्ष रेखा सेन ने जानकारी देते हुए बताया कि आशा एवं आशा सुपरवाइजर का पिछले चार माह से वेतन भुगतान रुका हुआ है। 15 मई को ज्ञापन सौंपने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं की गई। इसी कारण ग्रामीण क्षेत्र की लगभग 700 से 800 कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन हड़ताल करने के लिए बाध्य हुई हैं।
लंबित वेतन भुगतान नहीं
कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक उनका लंबित वेतन भुगतान नहीं किया जाता और उनकी अन्य मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा। इस हड़ताल से ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
ये है प्रमुख मांगें
स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों को घर-घर तक पहुंचाने में महत्ववपूर्ण भूमिका
जिलाध्यक्ष रेखा जैन ने बताया कि आशा और आशा सुपरवाइजर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य पूरी मेहनत, लगन और जिम्मेदारी से कर रही हैं। शासन की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं जैसे टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखरेख, प्रसव पूर्व व प्रसव पश्चात सेवाएं, बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, परिवार कल्याण एवं अन्य स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों को घर-घर तक पहुंचाने में इनकी महत्ववपूर्ण भूमिका रहती है।
मानदेय समय पर नहीं मिलने के कारण कई कार्यकर्ताओं की स्थिति कमजोर
कोरोना काल सहित हर परिस्थितियों में इन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह पूरी निष्ठा से किया है। मानदेय समय पर नहीं मिलने के कारण कई कार्यकर्ताओं की स्थिति कमजोर है, जो इसी मानदेय पर अपने परिवार का पालन-पोषण करती हैं। ज्ञापन के समय जिला महामंत्री मनीषा चौहान सहित सैलाना, बाजना, रावटी, पिपलौदा, ताल, आलोट, जावरा, बिलपांक आदि स्थानों से 800 से अधिक आशा कार्यकर्ता और सुपरवाइजर बड़ी संख्या में मौजूद थी।