रतलाम

जिला अस्पताल : 13 मई तक कार्य पूरा होना था, 20 जुलाई तक आधा भी नहीं, जिनको बोलना चाहिए, वो मौन

शासकीय जिला अस्पताल में 300 बिस्तर का भवन निर्माण कार्य अत्यंत धीमी गति से चल रहा है, जिससे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। तय समय सीमा 13 मई तक कार्य पूरा होना था, लेकिन 20 जुलाई की स्थिति में भी यह आधा भी नहीं हो पाया है। यानी 24 माह पूरे हो गए, इस लचर व्यवस्था का खामियाजा प्रतिदिन मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
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Updated: 21 Jul 2026, 2:20 PM IST
ratlam hospital news
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रतलाम. शासकीय जिला अस्पताल में 300 बिस्तर का भवन निर्माण कार्य अत्यंत धीमी गति से चल रहा है, जिससे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। तय समय सीमा 13 मई तक कार्य पूरा होना था, लेकिन 20 जुलाई की स्थिति में भी यह आधा भी नहीं हो पाया है। यानी 24 माह पूरे हो गए, इस लचर व्यवस्था का खामियाजा प्रतिदिन मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। बेड खाली नहीं होने के कारण मरीजों को मेडिकल कॉलेज रैफर किया जा रहा है। वहीं, पोस्टमार्टम के लिए भी शव के साथ जिला अस्पताल के चिकित्सकों को मेडिकल कॉलेज जाने की मजबूरी है। जिनकी जिम्मेदारी धीमे कार्य पर बोलने की है, वो मौन है।

अस्पताल के अधिकांश वार्डों और परिसर में बारिश के दौरान पानी टपकने से स्थिति और गंभीर हो रही है। पिछले माह कलेक्टर ने मौके का मुआयना कर कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए थे, लेकिन निर्माण कंपनी समधडिय़ा बिल्डर्स प्रायवेट लिमिटेड जबलपुर अपनी गति से कार्य कर रही है। मप्र गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अंतर्गत स्वीकृत इस पुर्नधनत्वीकरण योजना की लागत करीब 50.37 करोड़ रुपए है। कार्य 24 नवंबर 2022 को कार्यादेश के बाद 13 मई 2024 से शुरू होकर 24 माह में पूरा होना था। नया चार मंजिला भवन बनेगा, लेकिन अब तक पहली मंजिल पर ही कार्य चल रहा हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर

जिला अस्पताल जैसी महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं में देरी का सीधा असर आम जनता की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। मरीजों को समय पर उपचार न मिलने या दूर रैफर किए जाने से उनकी परेशानी और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। इसके अलावा अस्पताल के कई भवन में बारिश के दौरान पानी टपकने की समस्या का सामना मरीज और डॉक्टर्स के साथ नर्सिंग स्टाफ भी कर रहा है। इसके बाद भी अस्पताल निर्माण की धीमी गति पर सभी मौन है।

बारिश में पानी टपकता

जिला अस्पताल का पुराना भवन 100 साल पुराना हैं, बारिश में पानी टपकता हैं। आइसोलेशन वार्ड में दरार आने पर नर्सिंग कॉलेज का पिछले वाला वार्ड खाली करवाया हैं, ताकि उसमें मरीजाें को शिफ्ट किया जा सकें। वर्तमान में अस्पताल में 280 बेड उपलब्ध हैं और इस मौसम में मरीज बढ़ रहे हैं, बेड की कमी के कारण रैफर करना पड़ता हैं।

- डॉ. एपी सिंह, सिविल सर्जन

Updated on:
21 Jul 2026, 2:20 PM IST
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