
रतलाम। ट्रांसफार्मर पर बढ़ता लोड, जलती डीपी को सुधार के लिए सुबह से देर रात तक इंतजार चंबल कॉलोनी में इंतजार अब किसानों की सब्र से बाहर हो रहा हैं। मंगलवार दोपहर कई किसान जला ट्रांसफार्मर लेकर चंबल कॉलोनी नहीं जाते हुए कलेक्टोरेट पहुंच कर धरना प्रदर्शन पर बैठ गए। खेतों में खड़ी फसल को पानी देने के लिए परेशान किसानों का आक्रोश मंगलवार को कलेक्टोरेट में देखने को मिला।
दूसरी तरफ चंबल कॉलोनी में कई किसान रात 10 बजे तक ट्रांसफार्मर मिलने का इंतजार में सुबह से बैठे नजर आए। किसान नारायण पाटीदार ने बताया कि सुबह से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन रात 10 बजे तक ट्रांसफार्मर नहीं मिला और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद हैं।
विद्युत वितरण कंपनी के खिलाफ नारेबाजी
धामनोद के किसान बार-बार जल रहे विद्युत ट्रांसफार्मर डीपी को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंच गए। किसानों ने परिसर में जला हुआ ट्रांसफार्मर रखकर धरना दिया और विद्युत वितरण कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों ने बताया कि खेत पर लगे ट्रांसफार्मर की क्षमता 100 केवी है, जबकि उस पर करीब 128 से 130 प्रतिशत तक लोड डाल रखा है।
चंबल कॉलोनी और बिजली कंपनी के चक्कर काट रहे किसान
ओवरलोड के कारण ट्रांसफार्मर बार-बार जल जाता है। कम वोल्टेज के चलते सिंचाई मोटरें भी खराब हो रही हैं। हर बार डीपी बदलवाने के लिए चंबल कॉलोनी और बिजली कंपनी के चक्कर काटने पड़ते हैं। ट्रांसफार्मर लाने-ले जाने का भाड़ा भी किसानों को अपनी जेब से देना पड़ रहा है। कम बारिश और सूखे जैसे हालात में सिंचाई नहीं होने से खेतों में खड़ी फसल सूखने की कगार पर है।
रात तक करना पड़ रहा इंतजार
एसएलआर सविता राठौर ने किसानों से समस्या पूछी और ज्ञापन देने की बात कहीं, किसानों ने मना कर दिया कि विद्युत वितरण कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी को बुलाने की मांग की। तहसीलदार आशीष उपाध्याय ने कार्यपालन यंत्री विक्रांत ठाकुर को फोन कर मौके पर बुलाया। किसानों ने उनके सामने अपनी समस्याएं रखीं। ठाकुर ने स्टोर में 200 केवी का ट्रांसफार्मर उपलब्ध होने पर उसी दिन देने का आश्वासन दिया। इसके बाद किसानों ने धरना समाप्त किया और जली डीपी चंबल कॉलोनी पहुंचाई। धरने पर धामनोद के किसान अनिल पाटीदार, दिनेश पाटीदार, कैलाश पाटीदार, आशीष पाटीदार सहित युवा कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र सिंह सेजावता, मानवेंद्र सिंह लुनेरा सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
किसानों की प्रमुख मांगें
100 केवी के स्थान पर 200 केवी का ट्रांसफार्मर लगाया जाए या अतिरिक्त डीपी दी जाए।
तिरछे और जर्जर बिजली पोल बदले जाएं।
ट्रांसफार्मर बदलने और सुधार कार्य का खर्च विभाग उठाए।
वरिष्ठ अधिकारी मौके पर निरीक्षण कर स्थायी समाधान करें।