
रतलाम। अंगे्रजी का जुलाई माह व हिंदी का आषाढ़ माह खुब खास है। इस माह चतुर्थी, एकादशी, अमावस के साथ गुप्त नवरात्रि का पर्व खास रहेगा। राशि अनुसार इस नवरात्रि पर दान, पूजा की जाए तो इसका विशेष महत्व रहेगा। ये बात केरल की तंडी ज्योतिष परंपरा के जानकार व मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषी वीरेंद्र रावल ने की। वे इंद्रा नगर में भक्तों को जुलाई माह में आ रहे विशेष पर्व के बारे में बता रहे थे।
ज्योतिषी रावल ने बताया कि आषाढ़ माह एक माह तक चलेगा। 27 जुलाई को पूर्णिमा के साथ ही इस हिंदी माह की समाप्ती हो जाएगी। हिंदी माह के नाम नक्षत्र के आधार पर रखे गए है। आषाढ़ माह का नाम भी पूर्वाषाढ़ा व उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के नाम पर ही रखा गया है। आषाढ़ मास में हिंदू धर्म के अनेक तीज-त्यौहार आ रहे है।
सबसे पहले चतुर्थी
सबसे पहलेे चतुर्थी आषाढ़ माह में 2 जुलाई को दिनभर मनाई जाएगी। कृष्णपक्ष की ये चतुर्थी का विशेष महत्व है। इस दिन चंद्रमा के दर्शन के बाद ही पानी से लेकर अन्न का ग्रहण किया जाता है। इस दिन सुबह से महिलाएं अपने पति के लिए व्रत रखती है। इसके अलावा ज्योतिष में बुध ग्रह को मजबूत करने के लिए भी इस व्रत को किया जाता है।
योगिनी एकादशी
चतुर्थी के बाद आएगी योगिनी एकादशी। अंगे्रजी केलेंडर के अनुसार 9 जुलाई को योगिनी एकादशी का पर्व आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में मनाया जाएगा। एकादशी में व्रत रखा जाता है। इस दिन फलाहार के अलावा अन्य कुछ ग्रहण नहीं किया जाता है। इस दिन भगवान श्री विष्णु लक्ष्मी की पूजन करने से लाभ होता है।
आषाढ़ अमावस्या
कृष्ण पक्ष में आषाढ़ की अमावस्या 13 जुलाई को होगी। ज्योतिष में 13 नंबर को राहु का प्रतिनिधि माना जाता है। 13 जुलाई को आ रही ये अमावस पूर्वज से लेकर परिवार की पवित्र आत्माओं को याद करने के लिए सबसे बेहतर दिन माना जाता है। अमावस के दिन दान-पुण्य करने से लाभ होता है। कालसर्प दोष व शनि का दोष हो तो इस दिन उपाय करने से लाभ होता है।
गुप्त नवरात्रि
आषाढ़ माह में गुप्त नवरात्र का पर्व 13-14 जुलाई से शुरू हो जाएगा। हिंदू कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक वर्ष में चार नवरात्रि होती है। इसमे आषाढ़, अश्विन माह के बाद माघ माह में भी शुक्ल पक्ष से नवरात्रि शुरू हो जाती है। लेकिन इनको गुप्त नवरात्री कहा जाता है।
जग्गनाथ यात्रा
आषाढ़ माह में अंगे्रजी कैलेंडर के अनुसार रतलाम में 14 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकलेगी। ये यात्रा शहर के विभिन्न मार्गो से होकर निकलती है व भक्त इसका स्वागत उत्साह से करते है।
आषाढ़ और गुरु पूर्णिमा
अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 27 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा है। आषाढ़ पूर्णिमा का दिन बहुत ही खास होता है। इसके अलावा इस दिन को गुरु पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा आदि के रूप में भी मनाया जाता है। इसमे गुरु की पूजा की जाती है। मान्यता है कि जिनका कोई गुरु न होता है, वे सदाशिव को अपना गुरु स्वीकार करते है।
देवशयनी एकादशी
साल में कुल 24 एकादशी होती है। जिसमें देवशयनी एकादशी बहुत ही खास एकादशी होती है। इस एकादशी पर सभी मांगलिक उत्सव, कार्यक्रमों पर विराम लग जाता है। दरअसल मान्यता है कि भगवान विष्णु इस दिन से चतुर्मास के लिये विश्राम करने क्षीर सागर में चले जाते हैं व देवउठनी एकादशी को ही जागते हैं। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी देवशयनी एकादशी कही जाती है। इस वर्ष देवशयनी एकदशी 23 जुलाई को है।