वो मुसलमान है, लेकिन हिंदू बहनों की आंख का है तारा
रतलाम। वेसे वो हिंदू नहीं है। मुसलमान धर्म का पालन करता है। क्योकि जन्म एक मुस्लिम के घर हुआ। उम्र करीब 30 से कुछ उपर। कभी बाइक पर तो कभी पैदल ही वो सड़क पर नजर आता है। लेकिन जब बात शहर के शिवशंकर कॉलोनी में इनके नाम के बारे में हो, तो हर हिंदू बहन कहती है वो हमारी आंखों का तारा है। रक्षाबंधन के पर्व पर करीब 300 से अधिक बहनों ने इस मुस्लिम भाई को राखी बांधी। यूं कहे कि पूरी बस्ती की हर महिला ने राखी बांधी। हम बात कर रहे है शहर में सांप्रदायिक एकता की मिसाल शेरू पठान की।
क्षेत्र की अनिता सिंह, राजकुमारी यादव, मनमोहन परवल सहित अनेक लोगों ने बताया कि उनके क्षेत्र में लंबे समय से अनेक चुनाव आए व चले गए। लेकिन ये अकेले है जो बगैर चुनाव या राजनीति के मदद करते है। गर्मी में पेयजल की समस्या हो तो मोहल्ले के लोगों को शेरू पठान की याद आती है। आधारकार्ड बनवाना हो या सीएम संबल बिजली योजना हो, राशन कार्ड बनवाना हो या अन्य कुछ कार्य। शेरू पठान का नंबर इस मोहल्ले में हर किसी के मोबाइल में दर्ज है।
अंडरब्रिज के मामले में आए थे चर्चा में
बता दे कि पठान सबसे पहले चर्चा में तब आए जब उन्होने जावरा फाटक पर अंडरब्रिज की मांग को लेकर आंदोलन किया। 100 दिन तक धरना, 4 दिन की भूख हड़ताल की। इसके बाद एक हजार से अधिक पत्र यूपीए की तत्कालीन चेयरपर्सन सोनियागांधी को भेजे। इसके बाद इस क्षेत्र में अंडरब्रिज की मंजूरी हुई। इसके बाद ये इस क्ष्ेात्र में ये नाम जाना पहचाना हो गया। इसके बाद से ही मोहल्ले की सभी बहने, माताएं हर राखी पर्व पर पठान को राखी बांधती है। इतना ही नहीं, मोहल्ले में किसी के यहां खुशी हो या गम, पठान की उपस्थिति रहती है।
वो हमारे लिए फरिश्ता है
मोहल्ले की राजदुलारी कहती है कि वो हमारे लिए फरीश्ता है। जब समस्या हो, नेता आए न आए, ये भाई खड़ा रहता है। इसलिए पिछले पांच वर्षो से लगातार पूरे मोहल्ले की बहने राखी बांध रही है।
इंसान बना रहूं ये काफी
ये लोगों का प्यार है। इंसानियत जिंदा रहे, ये काफी है। इंसान ही इंसान के काम आता है।
- शेरू पठान, सामाजिक कार्यकर्ता