@Patrika Sting Operation- नर्सिंग होम की तरह झोलाछाप भी भर्ती रख कर रहे हैं इलाज

गांवों में इन लोगों ने अपनी दुकान इतनी जमा ली है कि एक एमबीबीएस डॉक्टर के नर्सिंग होम जैसी आम मरीजों को भर्ती करने और इलाज करने की सुविधा भी शुरू कर रखी है।

3 min read
Dec 26, 2016
Ratlam News


रतलाम। गांव-गांव फैली झोलाछाप डॉक्टरों की इलाज की दुकानों को देखने वाला कोई नहीं है। गांवों में इन लोगों ने अपनी दुकान इतनी जमा ली है कि एक एमबीबीएस डॉक्टर के नर्सिंग होम जैसी आम मरीजों को भर्ती करने और इलाज करने की सुविधा भी शुरू कर रखी है। यही नहीं कुछ जनस्वास्थ्य रक्षक भी धड़ल्ले से मरीजों को अपने क्लिनिक पर भर्ती करके इलाज किए जा रहे हैं। कुछ बंगाली डॉक्टर तो स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों की शरण में ही अपनी दुकान चला रहे हैं। पत्रिका ने दूर आदिवासी अंचल के सरवन जैसे बड़े गांव में इसकी छानबीन की तो यहां बंगाली और बिना डिग्री के इलाज करते हुए ढेरों डॉक्टर गांव की लगभग हर गली में आसानी से क्लिनिक चलाते हुए दिखे।




टीम को देख मरीजों को छोड़ भाग गए


Ratlam News


एक छोटे से शटर की दुकान में सबसे आगे टेबल-कुर्सी लगी है और पास ही लंबी बैंच पर चार-पांच मरीज बैठे हुए हैं। पत्रिका टीम यहां पहुंची तो यहां इलाज करने वाला डॉक्टर मदन निनामा मरीजों को बाजार से दवाई लाने का कहकर धीरे से निकल गया। टीम ने मरीजों से डॉक्टर के बारे में पूछा तो उनका कहना था कि वे बाजार गए हैं। क्लिनिक के दूसरे कमरे में झांककर देखा तो दो महिलाएं यहां लेटी हुई है। एक को स्लाइन चढ़ चुकी थी और दूसरे को चढ़ाने की तैयारी की जा रही थी। ग्रामीण भी इतने पक्के कि डॉक्टर का नाम बताने को तैयार नहीं। टीम ने क्लिनिक पहुंचने के दौरान वहां से निकले शख्स की पहचान करते हुए बाजार में उसे रोककर पूछा तो नाम मदन निनामा बताया। डिग्री की जानकारी लेने पर वह कहता है कि अभी नहीं आई है। मरीजों का इलाज क्यों कर रहे हो तो कहता है सालभर से कर रहा हूं किसी को कोई तकलीफ नहीं हुई। अब डिग्री भी आ जाएगी। कोई जांच करने अब तक उसके यहां आया है तो उसका कहना था कि कोई नहीं आया।

पहले कहा मैं डॉक्टर, फिर कहा जियाजी बैठते हैं


Ratlam News


बेड़दा रोड से गांव में आने पर चौराहे से दायीं तरफ पलटने पर लंबा रास्ता तय करके एक बड़ के पेड़ के पास पत्रिका टीम रुकी। यहां एक बंगाली डॉक्टर शंकर विश्वास का क्लिनिक मिला। बाहर डॉक्टर की टेबल कुर्सी और पास ही बैंच लगी है। इसी क्लिनिक के अंदर चार पलंग लगे हैं जिन पर मरीजों को लेटाकर इलाज की व्यवस्था है। पूछने पर शुरू में शंकर विश्वास ने कहा मैं ही इलाज करता हूं आपको क्या इलाज करवाना है। थोड़ी ही देर में उसे शंका हो गई तो वह संभला और कहने लगा मेरे जियाजी का यह क्लिनिक है। मैं तो यूं ही बैठा हुआ हूं। जियाजी कहां हैं तो कहता है कलकत्ता गए हैं। यहां एक मरीज को चढऱही स्लाइन के बारे में पूछा तो कहते हैं कि अस्पताल के डॉक्टर के मरीज हैं और उन्होंने ही स्लाइन चढ़ाने यहां भेजा है। पुन: पूछने पर डॉक्टर ने यही दोहराया कि डॉक्टर ने भेजा तो स्लाइन चढ़ा दी। डिग्री तो उसके पास बंगाल की है और यहां मरीजों का धड़ल्ले से इलाज कर रहे हैं। यह डिग्री भी ये डॉक्टर पत्रिका टीम को नहीं दिखा सके।

लगातार चलेगी कार्रवाई

फर्जी या बिना डिग्री के डॉक्टरों के खिलाफ लगातार कार्रवाई चलेगी। कोई भी फर्जी या बिना डिग्री का डॉक्टर नियमानुसार इलाज नहीं कर सकता है। सरवन में पहले ही दो फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।

आरपी वर्मा, एसडीएम सैलाना
टीम को देख मरीजों को छोड़ भाग गए
Published on:
26 Dec 2016 10:00 am
Also Read
View All