
जैसलमेर. जेसीसीबी परिसर में शव रख कर विरोध प्रदर्शन करते हुए।
जैसलमेर. जैसलमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक परिसर में गुरुवार को उस समय हडक़म्प मच गया, जब कुछ दिन पहले बैंक की नौकरी से हटाए गए संविदाकर्मी का शव लेकर उसके परिजन वहां पहुंच गए और उन्होंने चादर में ढंके शव को बैंक की मुख्य शाखा के बाहर रख कर धरना शुरू कर दिया। गौरतलब है कि जैसलमेर के सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक प्रबंधन की ओर से गत दिनों 11 संविदा कर्मचारियों को नौकरी से हटाया गया था। जिसमें सहायककर्मी के तौर पर वर्ष 2012 से सेवाएं दे रहे राजेश मेघवाल (43) पुत्र ठाकुर राम, निवासी वाल्मीकि कॉलोनी, जैसलमेर का भी नाम था।
परिवारजनों का कहना है कि राजेश को गत 27 जुलाई को नौकरी से हटाया गया और उसके बाद वह गहरे डिप्रेशन का शिकार हो गया। उसकी तबीयत बिगड़ जाने पर गत बुधवार को उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से चिकित्सकों ने उसे जोधपुर रेफर कर दिया। जहां गुरुवार को उसकी मौत हो गई। राजेश अपने पीछे दो पुत्र, पत्नी और माता-पिता को छोड़ गया है। धरना दे रहे लोग मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
गुरुवार को जोधपुर में राजेश कुमार की मौत के बाद गुस्साए परिजन और अन्य लोग उसके शव को लेकर सीधे बैंक पहुंचे और वहां बैंक के प्रबंध निदेशक के खिलाफ प्रदर्शन किया। मृतक के रिश्तेदारों ने बताया कि राजेश कुमार वर्षों से बैंक में कार्यरत था और उसका परिवार उसकी नौकरी से होने वाली आय पर ही निर्भर थे। नौकरी से निकाले जाने के बाद वह बहुत तनाव में आ गया। बैंक प्रशासन ने 27 जुलाई को अचानक राजेश सहित 11 कर्मचारियों को सेवा से बाहर कर दिया। बताया जाता है कि उसके अगले दिन राजेश ने अधिकारियों से पुन: नौकरी पर रखने की गुहार भी लगाई। के सामने नौकरी पर रखने की गुहार लगाता रहा, लेकिन उसकी फरियाद किसी ने नहीं सुनी।
बैंक परिसर में शव रख कर प्रदर्शन किए जाने की सूचना मिलने पर शहर कोतवाल सुरजाराम मय जाब्ता मौके पर पहुंचे। प्रशासन की ओर से तहसीलदार भी आए। दूसरी ओर जिला कांग्रेस अध्यक्ष अमरदीन फकीर, पूर्व जिला प्रमुख अंजना मेघवाल, सामाजिक कार्यकर्ता पवन वैष्णव आदि भी बैंक पहुंचे। उन्होंने प्रबंध निदेशक वेदप्रकाश सैनी के कक्ष में पहुंच कर उनसे बातचीत की और इस घटना पर असंतोष जताया। प्रबंध निदेशक ने बैंक की आर्थिक स्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि बैंक के पास इतने कर्मचारियों को वेतन चुकाने के पैसे नहीं है। ज्यादा विरोध होने पर प्रबंध निदेशक ने स्वयं को पद से हटाने के लिए भी कह दिया। करीब 3.30 बजे पुलिस व प्रशासन की समझाइश के बाद परिवारजन शव को अस्पताल की मोर्चरी भेजने पर रजामंद हुए। शाम तक वहीं पर लोग अपनी मांगों को लेकर धरना लगा कर बैठे हैं।
Updated on:
30 Jul 2026 09:01 pm
Published on:
30 Jul 2026 08:53 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
