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Jaisalmer: माहवारी पर सिस्टम की लाचारी… जिले में एक साल से सैनेटरी पैड का वितरण बंद

पोकरण. राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी आई एम शक्ति उड़ान योजना सीमावर्ती जैसलमेर जिले में जिम्मेदारों की अनदेखी और प्रशासनिक सुस्ती के चलते वेंटीलेटर पर पहुंच गई है। गत करीब डेढ़ वर्ष से सैनेटरी नेपकिन की आपूर्ति ठप होने से हजारों स्कूली छात्राओं और आंगनबाड़ी से जुड़ी महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। ऐसे में माहवारी स्वच्छता और संक्रमण रोकथाम को लेकर सरकार के दावे भी सवालों के घेरे में हैं।
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जैसलमेर में स्थित बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय भवन।

पोकरण. राज्य सरकार की ओर से स्कूली छात्राओं और आंगनबाड़ी से जुड़ी महिलाओं के लिए शुरू की गई आई एम शक्ति उड़ान योजना जिम्मेदारों की अनदेखी व प्रशासनिक सुस्ती के कारण वेंटीलेटर पर है। सीमावर्ती जिले में गत एक वर्ष से सैनेटरी नेपकिन की आपूर्ति बंद पड़ी है। ऐसे में किशोरियों व महिलाओं को संक्रमण से बचाने और माहवारी स्वच्छता के प्रति जागरुक करने के दावे धरातल पर हवा हो रहे है। गौरतलब है कि राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में शामिल आई एम शक्ति : उड़ान योजना संचालित की जाती है। जिसके अंतर्गत प्रत्येक किशोरी व महिला को प्रतिमाह 2 पैकेट कुल 12 सैनेटरी नेपकिन वितरित किए जाते है। सरहदी जिले में गत एक-डेढ़ वर्ष से सैनेटरी नेपकिन की आपूर्ति पूरी तरह से बंद पड़ी है। जिसके कारण किशोरियों व महिलाओं को बाजार से महंगे दामों में नेपकिन खरीदने पड़ रहे है।

हाजरी पर ब्रेक, शिक्षण प्रभावित

जिले के सरकारी विद्यालयों में कक्षा 6 से 12वीं तक में अध्ययन करने वाली किशोरियों और आंगनबाड़ी केन्द्रों से जुड़ी महिलाओं को सैनेटरी नेपकिन वितरित किए जाते है। योजना शुरू होने पर बालिकाओं के लिए यह वरदान साबित हुई थी, लेकिन अब नेपकिन की आपूर्ति नहीं होने के कारण माहवारी के दौरान किशोरियों को विद्यालय से छुट्टी से लेनी पड़ती है, जिससे उनका शिक्षण कार्य भी प्रभावित हो रहा है।

आर्थिक तंगी में खरीदना मुश्किल

ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को भी बाजार से महंगे दामों में नेपकिन खरीदना मुश्किल हो रहा है। विशेष तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं व किशोरियों के लिए बाजार से महंगे दामों में नेपकिन खरीदना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में पुराने व अस्वास्थ्य तरीके अपनाने के लिए वे मजबूर होते है, जिससे संक्रमण फैलने का भी खतरा रहता है।

एक बार आपूर्ति, लेकिन डिफेक्टिव मिले

सैनेटरी नेपकिन की आपूर्ति महिला एवं बाल विकास विभाग के महिला अधिकारिकता विभाग की ओर से की जाती है। जिलेभर के सरकारी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केन्द्रों, महाविद्यालयों, मदरसों व छात्रावासों में आपूर्ति होती है। सूत्रों के अनुसार गत फरवरी, मार्च व अप्रेल माह की आपूर्ति जैसलमेर जिले में मिली थी, लेकिन सैनेटरी नेपकिन डिफेक्टिव होने के कारण उनका वितरण नहीं किया जा सका। ऐसे में गत एक-डेढ़ वर्ष से किशोरियां व महिलाएं सैनेटरी नेपकिन का इंतजार कर रही है।

1.10 लाख से अधिक लाभार्थी

- जिले में 821 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 79651 महिलाओं को 4 लाख 77 हजार 906 पैड वितरित होते है

- 575 विद्यालयों में 28438 किशोरियों को 1 लाख 70 हजार 628 पैड का होता है वितरण

- अन्य 39 संस्थाओं में 2895 लाभार्थियों को 17 हजार 370 पैड वितरित होते है

- कुल 1435 संस्थाओं में 1 लाख 10 हजार 984 जनों को 6 लाख 65 हजार 904 पैड वितरित किए जाते है

नहीं हो रही आपूर्ति

गत एक-डेढ़ वर्ष से जिले में सैनेटरी नेपकिन की आपूर्ति बंद है। इसके लिए कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखे गए है। हालांकि पूर्व में एक बार आपूर्ति हुई थी, लेकिन डिफेक्टिव होने से नेपकिन का वितरण नहीं हो सका। नेपकिन प्राप्त होते ही सभी जगह वितरित करवा दिया जाएगा।

- चंद्रवीरसिंह, सहायक निदेशक महिला अधिकारिकता विभाग, जैसलमेर