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Jaisalmer: सावन में फूलों से महकेंगे शिवालय, रेगिस्तान ओढ़ेगा आस्था और सौंदर्य की चादर

श्रद्धालुओं को हर दिन अलग स्वरूप में भगवान शिव के दर्शन कराने की तैयारी की गई है।.शहर के प्राचीन देवचंद्रेश्वर मंदिर में विशेष श्रृंगार के साथ आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन होगा। मंदिर परिसर को सजाया जाएगा।
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जैसलमेर. सावन मास से पूर्व सजने लगे शिवालय।

जैसलमेर. मरुधरा में सावन का उल्लास अब शिवभक्ति के रंग में और गहरा होने जा रहा है। जिले के प्रमुख शिवालयों में फूलों की मनमोहक सजावट, आकर्षक श्रृंगार और विशेष धार्मिक आयोजनों की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। पूरे सावन माह में मंदिरों को स्थानीय फूलों, हरियाली, पारंपरिक सजावटी कलाकृतियों और रंग-बिरंगी विद्युत रोशनी से सजाया जाएगा। श्रद्धालुओं को हर दिन अलग स्वरूप में भगवान शिव के दर्शन कराने की तैयारी की गई है।.शहर के प्राचीन देवचंद्रेश्वर मंदिर में विशेष श्रृंगार के साथ आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन होगा। मंदिर परिसर को सजाया जाएगा। वहीं मुक्तेश्वर महादेव मंदिर में हर सोमवार शिव स्तुति और दीप सज्जा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेगी। वरुणेश्वर मंदिर, रत्नेश्वर मंदिर और चंद्रमोलेश्वर मंदिर में भी मंदिरों में बेलपत्र, धतूरा, पुष्पमालाओं और पारंपरिक सजावटी सामग्री से भगवान शिव का श्रृंगार किया जाएगा। शाम की आरती के समय दीपों की रोशनी और पुष्प सज्जा मंदिरों की सुंदरता को और निखारेगी।

फूलों, हरियाली, पारंपरिक कलाकृतियों से आकर्षक बनेगा हर शिवालय परिसर

शिव मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। मंदिर परिसरों की साफ-सफाई, रंग-रोगन, आकर्षक प्रवेश द्वार, रोशनी और पेयजल जैसी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। कई स्थानों पर स्वयंसेवक श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था और प्रसाद वितरण की जिम्मेदारी संभालेंगे। सावन के दौरान स्थानीय फूलों का उपयोग बढ़ने से मंदिरों की सजावट में मरुधरा की सांस्कृतिक पहचान भी झलकेगी। कई शिवालयों में कृत्रिम सजावट के बजाय प्राकृतिक फूलों, पत्तियों और पारंपरिक हस्तनिर्मित सजावटी सामग्री को प्राथमिकता दी जा रही है।

तैयार होगा धार्मिक माहौल, मिलेगी संस्कृति को पहचान

इससे धार्मिक वातावरण के साथ स्थानीय कला और संस्कृति को भी नई पहचान मिलेगी। श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार, प्रदोष और अन्य विशेष अवसरों पर सुबह से देर रात तक जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्रपाठ, भजन-कीर्तन और महाआरती का क्रम चलेगा। मंदिर समितियों का मानना है कि इस बार सावन में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी इन सजे-धजे शिवालयों का दर्शन करेंगे। आस्था, संस्कृति और सौंदर्य का यह अनूठा संगम सावन भर जैसलमेर की धार्मिक पहचान को नई चमक देगा।