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Jaisalmer: प्रपत्र-10 की दौड़ में उलझे शिक्षक, तीन बार बढ़ी समयसीमा

जैसलमेर. सरकारी विद्यालयों में जुलाई का महीना नए शैक्षणिक सत्र की मजबूत नींव रखने का समय होता है, लेकिन इस बार हजारों शिक्षक पढ़ाई से अधिक शाला दर्पण पोर्टल पर प्रपत्र-10 अपडेट करने में व्यस्त हैं। बार-बार बढ़ाई गई अंतिम तिथि और तकनीकी दिक्कतों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब बहस इस बात पर है कि शिक्षक की प्राथमिक जिम्मेदारी विद्यार्थियों को पढ़ाना है या सरकारी पोर्टलों पर डेटा अपडेट करना।
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जैसलमेर. सरकारी विद्यालयों में जुलाई केवल नए सत्र की शुरुआत नहीं, बल्कि पूरे शैक्षणिक वर्ष की दिशा तय करने वाला महीना माना जाता है। इसी दौरान नए विद्यार्थियों का प्रवेश, ड्रॉपआउट रोकने के प्रयास, आधारभूत सीखने की शुरुआत और अभिभावकों से संवाद जैसे सबसे महत्वपूर्ण काम होते हैं। विडंबना यह है कि इस बार प्रदेश के लाखों शिक्षक इन प्राथमिक जिम्मेदारियों से अधिक समय शाला दर्पण पोर्टल पर प्रपत्र-10 अपडेट करने में लगा रहे हैं। शिक्षा विभाग इसे रिकॉर्ड अद्यतन रखने की सामान्य प्रक्रिया मान रहा है, लेकिन शिक्षक संगठनों, शिक्षाविदों और शिक्षा प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों का सवाल अलग है—क्या सरकारी विद्यालयों में शिक्षक की सबसे बड़ी भूमिका पढ़ाना है या डेटा एंट्री करना? प्रपत्र-10 भरने की अंतिम तिथि पहले 10 जुलाई तय हुई। सर्वर की धीमी गति और तकनीकी बाधाओं के चलते हजारों शिक्षक समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके। इसके बाद अंतिम तिथि 20 जुलाई की गई। हालात नहीं सुधरे तो विभाग को एक बार फिर समयसीमा बढ़ाकर 31 जुलाई करनी पड़ी।

स्थिति एक नजर में

- पहली समयसीमा : 10 जुलाई

-दूसरी समयसीमा : 20 जुलाई

- वर्तमान अंतिम तिथि : 31 जुलाई

- प्रभावित : प्रदेशभर के लाखों शिक्षक

- सबसे अधिक असर : जुलाई का शिक्षण और प्रवेश अभियान

जब पूरा रिकॉर्ड मौजूद है, फिर हर साल वही प्रक्रिया क्यों?

यही वह प्रश्न है जो सबसे अधिक चर्चा में है। शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति, सेवा पुस्तिका, वेतन, पदस्थापन, पदोन्नति और अन्य सभी रिकॉर्ड पहले से विभागीय कार्यालयों तथा डिजिटल डेटाबेस में उपलब्ध हैं। ऐसे में हर वर्ष उन्हीं सूचनाओं को दोबारा भरवाना समय और संसाधनों की पुनरावृत्ति जैसा प्रतीत होता है। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि हालिया स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बावजूद अनेक विसंगतियों की शिकायतें सामने आईं। इससे यह बहस और गहरी हो गई कि यदि डेटा पहले से मौजूद है, तो उसे बार-बार भरवाने की आवश्यकता क्या है? और यदि डेटा भरोसेमंद नहीं है, तो वर्षों से चल रही यह प्रक्रिया कितनी प्रभावी है?

यह हो समाधान

-केवल बदली हुई जानकारी अपडेट कराई जाए।

-रिकॉर्ड सत्यापन मंत्रालयिक कर्मचारी करें।

-पोर्टल पूरे वर्ष खुला रहे।

-जुलाई जैसे महत्वपूर्ण महीने में अतिरिक्त -ऑनलाइन कार्य न्यूनतम रखे जाएं।

एक्सपर्ट व्यू : शिक्षक का समय सबसे मूल्यवान शैक्षणिक संसाधन

डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य काम कम करना होना चाहिए, काम बढ़ाना नहीं। यदि एक ही जानकारी हर वर्ष फिर से भरनी पड़े, सर्वर बाधा बने और शिक्षक को विद्यालय के बाद भी घंटों ऑनलाइन रहना पड़े, तो यह व्यवस्था शिक्षण की गुणवत्ता पर सीधा असर डालती है।प्रपत्र-10 का रिकॉर्ड अद्यतन मंत्रालयिक कर्मचारियों से कराया जाना चाहिए। रिकॉर्ड संधारण उनकी विशेषज्ञता का विषय है। शिक्षकों को बार-बार इस प्रक्रिया में लगाने से शिक्षण प्रभावित होता है। प्रपत्र-10 को पूरे वर्ष खुला रखा जाए और इसे अनिवार्य वार्षिक प्रक्रिया के बजाय आवश्यकता आधारित बनाया जाए।

-प्रकाश बिश्नोई, प्रदेश उपाध्यक्ष, राजस्थान पंचायतीराज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ