रतलाम

मानसून 19 तक अलर्ट: रूठे बादल शाम को बरसे

36 इंच की जरूरत, जिले में सिर्फ 22.7 इंच पानी, पिछले साल के मुकाबले 25 इंच से ज्यादा कम बारिश बाजना में हालात सबसे खराब, महज 15.9 इंच बरसा पानी। धोलावाड़ भी आधा खाली।
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Monsoon alert news ratlam
36 इंच की जरूरत, जिले में सिर्फ 22.7 इंच पानी, पिछले साल के मुकाबले 25 इंच से ज्यादा कम बारिश बाजना में हालात सबसे खराब, महज 15.9 इंच बरसा पानी। धोलावाड़ भी आधा खाली।

रतलाम। सितंबर विदाई की ओर है और आसमान से बरसात की उम्मीद भी कमजोर पड़ती जा रही है। बारिश थमते ही गर्मी का पारा फिर चढऩे लगा है। सोयाबीन पीले पडऩे लगे हैं। दोपहर बाद से शुक्रवार शाम तक तेज तो कभी रिमझिम बारिश का दौर चलता रहा। शहर में मात्र 4 मिमी बारिश शाम 5 बजे तक दर्ज की गई।

ऐसे मौसम में जिले के किसानों के सामने अब खरीफ से ज्यादा रबी की चिंता खड़ी हो गई है। जिले की सामान्य औसत वर्षा करीब 36 इंच है, लेकिन इस मानसून में अब तक औसतन 22.7 इंच पानी ही बरसा है। पिछले साल इसी अवधि में 48 इंच बारिश हो चुकी थी।

बाजना में सबसे कम आलोट में सर्वाधिक बारिश
बाजना विकासखंड में इस बार महज 15.9 इंच बारिश हुई, जबकि पिछले साल 38.6 इंच पानी बरस चुका था। रतलाम में 694, आलोट में 749, जावरा में 628, ताल में 482, पिपलौदा में 614, रावटी में 443 और सैलाना में 541 मिमी बारिश दर्ज हुई है।

धोलावाड़ डेम 22.86 एमसीएम तक भर पाया
बारिश की कमी का असर जलस्रोतों पर भी साफ नजर आ रहा है। 49.95 एमसीएम क्षमता वाला धोलावाड़ जलाशय फिलहाल सिर्फ 22.86 एमसीएम तक भर पाया है। यानी जलाशय भी पूरी क्षमता से काफी दूर है। इस कारण यहां भी सिंचाई के साथ जल संकट गहरा सकता हैं।

19 सितंबर की सुबह तक बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग की 19 सितंबर तक बारिश की संभावना किसानों के लिए उम्मीद जरूर जगा रही है, लेकिन मानसून की विदाई से पहले होने वाली बारिश अब बेहद अहम हो गई है। खरीफ फसल किसी तरह पकने की उम्मीद है, मगर रबी के लिए खेतों में नमी और जलस्रोतों में पानी—दोनों की कमी बड़ा सवाल बन गई है।

आंकड़े मानसून
सामान्य बारिश: 36 इंच
अब तक: 22.7 इंच
पिछले साल: 48.0 इंच
बाजना: सिर्फ 15.9 इंच
धोलावाड़: क्षमता 49.95 एमसीएम, भराव 22.86 एमसीएम

इनका कहना है…
एक दो दिन में वर्षा का संकेत मिला हैं, बंगाल की खाड़ी बन रहे चक्रवात के कारण 19 सितंबर तक एक प्रदेश में बारिश की ओर उम्मीद हैं। अगर तेज बारिश होती हैं तो निकासी करे सोयाबीन फसलें पकने पर, लम्बी अवधि वाली में परेशानी नहीं हैं। मक्का-मुंगफली भी पक चुकी हैं, किसान भाई अगर तेज बारिश होती है तो जल निकासी की व्यवस्था हैं।
डॉ. सर्वश त्रिपाठी, कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा

Updated on:
18 Sept 2026 10:38 pm
Published on:
18 Sept 2026 10:29 pm