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सर्पों से डर नहीं, वैज्ञानिक समझ जरूरी

वन विद्यालय झाबुआ में 40-50 वनकर्मियों को सर्प पहचान, रेस्क्यू और सर्पदंश से बचाव का प्रशिक्षण में वनकर्मियों से आमजन को सर्पों के प्रति वैज्ञानिक जानकारी देने और मानव-सर्प संघर्ष कम करने का आग्रह किया।
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Rajasthan Snakebite symptoms What silent killer threat increases Jhunjhunu monsoon

Rajasthan Monsoon Snakebite : फोटो - AI

रतलाम। सर्पों की पहचान, व्यवहार और सुरक्षित रेस्क्यू के साथ आमजन में फैली भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य को लेकर प्रशिक्षण दिया गया। अधिकांश सर्प बिना उकसावे के मनुष्य पर हमला नहीं करते। इसलिए उनके प्रति डर के बजाय वैज्ञानिक समझ और सावधानी जरूरी है। सर्पदंश पर चार बातें याद रखें घबराएं नहीं, झाड़-फूंक न कराएं, घरेलू उपचार न करें, तत्काल अस्पताल पहुंचाएं

वन विभाग के वन विद्यालय, झाबुआ में सर्प सुरक्षा, संरक्षण एवं रेस्क्यू विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। इसमें करीब 40 से 50 वनकर्मियों ने भाग लिया। प्रशिक्षक गणेश मालवीय, पिपलौदा ने बताया कि सर्प पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में वन विभाग की अधिकारी सीमा सिंह सहित कर्मचारी उपस्थित रहे।

असुरक्षित तरीके से सर्प पकडऩे से बचने की सलाह
प्रशिक्षण में विषैले-विषहीन सर्पों की पहचान, सामान्य व्यवहार और रेस्क्यू के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी गई। कर्मचारियों को रेस्क्यू के दौरान अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने और असुरक्षित तरीके से सर्प पकडऩे से बचने की सलाह दी गई।

घरेलू उपचार से बचने पर जोर दिया
सर्पदंश की स्थिति में पीडि़त को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाने तथा झाड़-फूंक और घरेलू उपचार से बचने पर जोर दिया गया। मालवीय ने कहा कि सर्प संरक्षण केवल वन्यजीवों की रक्षा नहीं, बल्कि पर्यावरण और मानव जीवन की सुरक्षा से भी जुड़ा है।

रेस्क्यू में ये सावधानियां पहचान जरूरी ।

  • विषैले और विषहीन सर्पों की पहचान करें।
  • सुरक्षा पहले बिना प्रशिक्षण सर्प पकडऩे का प्रयास न करें।
  • सर्पदंश पर तुरंत इलाज
  • पीडि़त को तत्काल स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं।
  • भ्रांतियों से बचें झाड़-फूंक और घरेलू उपचार न करें।

सर्प दिखे तो लाठी नहीं, समझदारी काम आएगी
वनकर्मियों को मिला रेस्क्यू का प्रशिक्षण, सर्पदंश पर झाड़-फूंक से दूर रहने की सलाह
रतलाम। घर, खेत या जंगल में सर्प दिखते ही उसे मारने या पकडऩे की जल्दबाजी अब भारी पड़ सकती है। सर्प पर्यावरणीय संतुलन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और अधिकांश सर्प बिना छेड़छाड़ के मनुष्य पर हमला नहीं करते।

प्रशिक्षण में इन बातों पर रहा जोर
विषैले-विषहीन सर्पों की पहचान — कौन सा सर्प खतरनाक है और कौन नहीं, इसकी वैज्ञानिक जानकारी दी गई।
रेस्क्यू में जल्दबाजी नहीं — बिना प्रशिक्षण सर्प पकडऩे का प्रयास न करने और सुरक्षित तरीके अपनाने की सलाह दी गई।
सर्पदंश में समय सबसे महत्वपूर्ण — पीडि़त को तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने पर जोर दिया गया।
झाड़-फूंक से दूरी — सर्पदंश के बाद घरेलू उपचार और अंधविश्वास के बजाय चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी गई।
पहले रेस्क्यूकर्ता की सुरक्षा — सर्प पकड़ते समय अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही गई।