अधिकारियों के बीच तालमेल के अभाव में मेला बंद कराने पहुंची निगम की अधिकारी
रतलाम. चुनाव आचार संहिता की आड़ लेकर अधिकारी किस तरह मनमर्जी करने पर आ जाते हैं इसका ताजा उदाहरण कालिका माता मेले में शनिवार को देखने को मिला। निगम अधिकारियों के बीच तालमेल के अभाव ने मेले में आए दुकानदारों में हड़कंप की स्थिति पैदा कर दी। बेचारे दुकानदार दुकानें समेटने के डर से आधी ही खोल पाए थे। करीब तीन घंटे तक मेले में असमंजस की स्थिति रही और बाद में जाकर स्पष्ट हुआ कि मेला 24 अक्टूबर तक रहेगा तब कर्मचारियों और मेले के दुकानदारों ने राहत की सांस ली। सूत्र बताते हैं कि मेला अधिकारी गरिमा पाटीदार को कर्मचारियों ने मेले की अवधि 24 तक होने की जानकारी भी दी किंतु उन्होंने अनसुना कर दिया था। बाद में अधिकारियों ने अपनी कमजोरी छिपाने के लिए आचार संहिता की आड़ ले ली।
कालिका माता मंदिर परिसर में लगे नवरात्र मेले की दुकानों को लेकर अधिकारियों ने अपने अधिनस्थों को फरमान जारी कर दिया कि दशहरे के साथ ही मेला खत्म हो गया है इसलिए अब दुकानें बंद करवाएं। कर्मचारी भी दुकानें बंद करवाने के उ²ेश्य से तैयार होकर मेले में पहुंच गए किंतु आदेश का इंतजार करते रहे। यह सूचना दुकानदारों को लगी तो उनमें हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई। आखिरकार तीन घंटे बाद फिर से अधिकारियों ने फरमान जारी किया कि मेला 24 तारीख तक है तब जाकर कर्मचारियों और मेले के दुकानदारों ने राहत की सांस ली।
मेला आयोजन समिति का ही निर्णय था कि पिछले सालों की तरह ही इस बार भी मेला शरद पूर्णिमा तक लगाया जाए। इसके बाद निगम की तरफ से मेले में आने वाले दुकानदारों के लिए निकाली गई विज्ञप्ति में भी साफतौर से मेले की अवधि 10 से 24 अक्टूबर की अंकित करके टेंडर बुलाए गए थे। दुकानदारों ने भी इसी तिथि के हिसाब से टेंडर भरे। अचानक ही मेला बंद करने की सूचना से दुकानदार भी मायूस
हो गए। यूं भी मेला अवधि खत्म होने के एक-दो दिन तक दुकानें समेटनें में लग जाते हैं जो लगभग सभी मेले में अकसर देखने को मिलता है।
मेले की अवधि 24 अक्टूबर तक की ही रहेगी। हमें एसडीएम ने आदेश दे दिया है। एमआईसी ने क्या निर्णय किया यह नहीं पता किंतु एसडीएम के आदेश से मेला अब 24 अक्टूबर तक चलेगा। गरिमा पाटीदार, सहायक आयुक्त व मेला अधिकारी