
रतलाम। रेल मंडल में रतलाम से चित्तौडग़ढ़-कोटा तक विद्युतीकरण रेल लाइन डालने के कार्य की शुरुआत हो गई है। कोटा ? में ६ किमी तक लाइन डालने के बाद अब इस कार्य को करने वाली कंपनी ने जावरा से मंदसौर तक बिजली के पोल डालने के लिए गड्डे करना शुरू कर दिया है। कोलकाता की कंपनी ईएमसी ने तीन वर्ष में इस परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके पूरे होने के बाद यहां भी बिजली इंजन से ट्रेनें चलेगी, फिलहाल यहां डीजल से ट्रेनें चलाई जा रही है।
सांसद गुप्ता ने उठाई थी आवाज
रेल बजट में रतलाम से चित्तौडग़ढ़ होते हुए कोटा तक बिजलीकरण करने की घोषणा की गई थी। तत्कालीन रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने ये घोषणा की थी। इसके लिए मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता ने लगातार संसद में आवाज उठाई थी। इस परियोजना के पूरे होने से सबसे बड़ा लाभ तो डीजल की खपत कम होना व बिजली वाली ट्रेनों को मिलेगा, लेकिन यात्रियों को कम समय में अपने गंतव्य तक जाने की सुविधा भी मिलेगी। इस समय जो ट्रेने रतलाम से मंदसौर तक पहुंचाने में करीब २ घंटे लेती है, वे बिजली लाइन होने से करीब सवा घंटे में ही रतलाम से मंदसौर तक पहुंचा देगी। इसके अलावा इंदौर से चलने वाली ट्रेनें भी कम समय में मंदसौर से लेकर चित्तौडग़ढ़ तक पहुंचा करेगी। सबसे बड़ा लाभ तो मुंबई से लेकर हावड़ा व कोलकाता से आने वाली टे्रनों में होगा। इन ट्रेन के रतलाम में पहुंचने के बाद इंजन में बदलाव होता है, वो बंद हो जाएगा।
इस तरह चल रहा है काम
निर्माण कंपनी ने जावरा से चित्तौडग़ढ़ तक के सेक्शन में बिजली के पोल व तार डालने के लिए काम की शुरुआत कर दी है। फिलहाल बेस खड़ा किया जा रहा है। इसके बाद पोल लगाकर उनमे बिजली के तार डाले जाएंगे। कुछ समय पूर्व कंपनी रतलाम से नामली होते हुए जावरा तक ये कार्य कर चुकी है। इसके अलावा कोटा से चित्तौडग़ढ़ सेक्शन में करीब ६ किमी तक ये कार्य हुआ है। रेलवे के अनुसार अगले तीन वर्ष में इस कार्य को पूरा होना है।
यात्रियों को होगा लाभ
इस योजना के पूरे होने से न सिर्फ रेलवे को बल्कि यात्रियों को भी बड़ा लाभ होगा। इसके लिए निर्माण एजेंसी को तीन वर्ष का समय दिया गया है। अलग-अलग सेक्शन में इसके लिए तेजी से काम चल रहा है। - जेके जयंत, जनसंपर्क अधिकारी, रतलाम रेल मंडल