
रतलाम। आगामी 26 अगस्त सावन माह की पूर्णिमा को रक्षाबंधन या राखी का त्यौहार पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जाएगा। हर बहन चाहती है कि उसका लाड़ला भाई रोग से दूर रहे व उसके पास समस्या कभी भी नहीं आए। इसके लिए ये जरूरी है कि बहने अपने भाई की कलई पर वैदिक राखी बांधे। वैदिक राखी का महत्व रामायाण से लेकर महाभारत काल में भी बताया गया है। ये बात रतलाम के पूर्व राज परिवार के ज्योतिषी अभिषेक जोशी ने कही। वे नक्षत्रलोक में वैदिक राखी के महत्व को बता रहे थे।
ज्योतिषी जोशी ने कहा कि पूरे देश में भाई - बहन के प्रेम, समर्पण, त्याग का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व 26 अगस्त को मनाया जाएगा। देश व दुनिया में बहनें अपने प्यारे भाई की कलाई पर राखी बांधकर रक्षा का वचन लेंगी। पर्व को लेकर बाजार में रंग बिरंगी राखी की दुकानें भी सजकर तैयार हो गई हैं। वे बहने जो साथ रहती है वे बाजार से तो दूर रहने वाली अपने ससुराल से इसको खरीद रही है।
इसलिए महत्व है वैदिक राखी का
ज्योतिषी जोशी के अनुसार बहनों ने भी रेशम के धागे से लेकर बाजार में मिलने वाली बनावटी फूलों की बनी राखियों की खरीदारी शुरू कर दी है, लेकिन इनका महत्व केवल प्रतीकात्मक है। भारतीय वैदिक शास्त्रानुसार रक्षाबंधन के दिन अगर बहन भाई की कलाई पर वैदिक राखी बांधती हैं तो भाई में न केवल सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा बल्कि उसे संक्रामक रोगों से लडऩे की शक्ति भी मिलेगी। इसे ही असली रक्षासूत्र माना जाता है।
नाममात्र का होता है व्यय
ज्योतिषी जोशी के अनुसार समय के साथ पर्व व उनमें उपयोग होने वाली सामग्री में भी बदलाव हुआ है। शास्त्रानुसार कच्चे धागे की राखी बांधना चाहिए। वैदिक राखी भी बांधी जा सकती है। इसे आसानी के साथ घर पर तैयार किया जा सकता है। वैदिक राखी बांधने से बांधने वाले में बेहतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। बता दें कि वैदिक राखी बनाने में नाम मात्र का खर्च आता है।
हल्दी का करें इसमे उपयोग
ज्योतिषी जोशी ने बताया कि कच्चे सूत व हल्दी से बना रक्षा सूत्र शुद्ध व शुभ होता है। सावन में बारिश होती है। इस दौरान संक्रमण रोग फैलते हैं। इस राखी को बांधने से रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। हल्दी को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला माना जाता है। वहीं वैदिक राखी को सबसे अधिक सौभाग्यदायक माना जाता है। दुर्वा को लेकर कामना होती है कि भाई का वंश, दुर्वा के बेल की तरह बढ़ता रहे। यह भगवान गणेश की प्रिय है, इसलिए इसे विघ्नहर्ता के रूप में भी माना जाता है। अक्षत यानि चावल भाई बहन के अटूट रिश्ते के प्रतीक होते हैं। केसर तेजस्विता, चंदन शीतलता व सरसों को दुर्गुणों के प्रति तीक्ष्ण बनाए रखने की कामना के साथ शामिल किया जाता है।
सूत की राखी भी बांधी जा सकती
ज्योतिषी जोशी के अनुसार वैदिक राखी बनाने के लिए दुर्वा, अक्षत, चंदन, सरसों व केसर इन पांच चीजों की मात्रा लेकर इसे एक पीले रेशम के वस्त्र में बांध लेना चाहिए। इसको कलावा में बांधकर रक्षाबंधन के दिन भाई को बांधनी चाहिए। यह वैदिक राखी होती है। कच्चे सूत की राखी भी बांधी जा सकती है। कच्चे सूत को हल्दी में भिगोकर इसे सुखाया जाता है। इस तरह कच्चे सूत की राखी तैयार हो जाती है।