
रतलाम। शहर के फुटपाथों पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण के कारण राहगीरों की सुरक्षा खतरे में है। सुंदरता को भी ग्रहण लग रहा हैं। जिम्मेदारों की अनदेखी किसी भी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकती है, क्योंकि मजबूरी में पैदल यात्री सडक़ों पर चलने को विवश हैं, क्योंकि ऐसा लगता है जैसे सडक़ों के फुटपाथ बैचे जा चुके हैं।
नगर निगम का अमला शहर में भ्रमण कर दुपहिया वाहनों को उठाकर या थैलागाड़ी-दुकानों से बॉट, तराजू और वस्त्रादि उतारकर महज औपचारिकता पूरी कर रहा है। जबकि शहर की हर सडक़ के फुटपाथों पर दिनभर मिलीभगत से व्यापार फलफूल रहा है।
यहां हालत खराब, जिम्मेदार मुकदर्शक
शहर के व्यस्ततम क्षेत्रों जैसे लोकेंद्र टॉकीज चौराहा, बाल चिकित्सालय, एमसीएच रोड, राम मंदिर से अलकापुरी टेम्पो स्टैंड, थाने के सामने, दो बत्ती से न्यू रोड, फ्रीगंज से दिल बहार चौराहे से स्टेशन रोड, महू-नीमच रोड, फव्वारा चौक से अदालत चौराहा तक, तथा स्टेशन रोड थाना से छत्रीपुल के दोनों तरफ सडक़ों तक व्यापार-व्यवसाय किया जा रहा है।
मात्र मुख्य मार्केट में औपचारिकता
मुख्य बाजारों में शहर सराय से रानीजी का मंदिर, नाहरपुरा, धानमंडी, नौलाईपुरा माणकचौक, चांदनीचौक से तोपखाना, लोहार रोड, न्यू रोड से शास्त्रीनगर, पॉवर हाउस रोड़, डालूमोदी बाजार या कलाईगर रोड पर दिन में फुटपाथ नजर नहीं आते। यहां रात 11 बजे बाद ही फुटपाथों पर आवाजाही सामान्य दिखती है, सुबह से शाम तक इन पर दुकानदार, वाहन पार्किंग या व्यापार का कब्जा रहता है।
राहगीरों की सुरक्षा पर सवाल
फुटपाथों पर बढ़ते अतिक्रमण से न केवल पैदल यात्रियों को खतरा है, बल्कि यातायात भी बाधित होता है। यह स्थिति बच्चों और वृद्धों के लिए विशेष रूप से जोखिमपूर्ण है। अस्थायी कार्रवाई के बजाय, नगर निगम को स्थायी समाधान के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि शहर सुरक्षित और सुगम बना रहे।