
रतलाम. भारत देश महान है और यहां के लोग भी। इस यात्रा ने साबित कर दिया कि भारत में अपनापन और मदद का जज्बा आज भी जिंदा है। कहीं भी जाकर खड़े हो जाएं और प्रेम से बोल दें कि भाई साहब सोने की जगह चाहिए, तो मिल जाती है। एक-दो-तीन घर जाकर कहें तो भोजन भी मिल जाता है, कोई परेशान नहीं करता। यही कारण है कि रतलाम निवासी राजेंद्र शर्मा ने बगैर एक रुपए खर्च किए 13757 किमी की यात्रा पूरी की।
यह अनुभव साझा किया है रतलाम के सूरजमल जैन नगर निवासी 34 वर्षीय राजेंद्र शर्मा ने। राजेंद्र ने बिना एक रुपया खर्च किए 62 दिन में 13757 किमी की धार्मिक यात्रा पूरी की है। बुधवार शाम वे घर लौटे, इसके पूर्व जिले के जावरा, रतलाम शहर आने पर फव्वारा चौक पर ढोल-ढमाकों और पुष्पमाला से उनका जोरदार स्वागत किया गया।
लिफ्ट और पैदल तय किया सफर
राजेंद्र ने बताया कि वे घर से बिना पैसे लिए निकले थे। सफर कभी लोगों से लिफ्ट लेकर तो कभी पैदल तय किया। रोजाना 400-500 किमी का सफर आनंद-मंगल के साथ पूरा किया।
यात्रा का रूट
62 दिन की इस यात्रा में उन्होंने 51 शक्तिपीठ, 12 ज्योतिर्लिंग, चार बड़े धाम, उत्तराखंड के चार धाम और भारत-नेपाल दो देशों की यात्रा की। कुल 13757 किमी का सफर तय कर बुधवार शाम रतलाम पहुंचे। राजेंद्र घर से यात्रा पैदल सालाखेड़ी पहुंचकर 10 अप्रेल को शुरू की थी और 10 जून को घर लौट आए।
शहर में जगह-जगह स्वागत
फव्वारा चौक पर परिवार और मित्रों ने पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया। इसके बाद वाहन से चल समारोह के रूप में वे घर पहुंचे। जिले और शहर में कई स्थानों पर उनका स्वागत हुआ। इस दौरान बालकृष्ण शर्मा, मंजू शर्मा, बिंदिया शर्मा, उमा शर्मा, रित्वी और टिया शर्मा सहित बड़ी संख्या में शहरवासी मौजूद रहे। सभी ने यात्रा की सफलता पर हर्ष जताया।
51 शक्तिपीठ, 12 ज्योर्तिलिंग
शहर के सूरजमल जैन नगर निवासी 34 वर्षीय राजेंद्र शर्मा ने 62 दिन में बगैर एक रुपए खर्च किए लोगों से लिफ्ट लेकर तो कभी पैदल चलकर 51 शक्तिपीठ, 12 ज्योर्तिलिंग, चार बड़े धाम यात्रा, चार धाम उत्तराखंड़, दो देश भारत-नेपाल 13757 किमी की यात्रा कर पूरी कर बुधवार शाम घर पहुंचे। जिनका शहर के फव्वारा चौक पर परिवार के सहित मित्रों ने ढोल ढमाकों के साथ पुष्पमाला पहनाकर जोरदार स्वागत किया।