रतलाम

रतलाम मेडिकल कॉलेज: साफ-सफाई से दूर शौचालय-स्नानगृह-विश्रामगृह

मरीजों के महिला-पुरुष परिजनों मिलने वाली व्यवस्था पर सवाल, धूल खा रहे पलंग-बिस्तर, लोगों को पहुंचने में लगता है डर, जिम्मेदारों की अनदेखी।
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Ratlam Medical College news
मरीजों के महिला-पुरुष परिजनों मिलने वाली व्यवस्था पर सवाल, धूल खा रहे पलंग-बिस्तर, लोगों को पहुंचने में लगता है डर, जिम्मेदारों की अनदेखी।

रतलाम। रतलाम मेडिकल कॉलेज में मरीजों के परिजनों के लिए बनाया गया विश्रामगृह झाडिय़ों, गंदगी और सुनसान माहौल के कारण वीरान पड़ा है। महिला-पुरुषों के लिए सुविधा होने के बावजूद वहां पहुंचने में डर लगता है। शौचालय और स्नानगृह की बदहाल व्यवस्था तथा बुनियादी सुविधाओं का अभाव जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। यह स्थिति है कि विश्राम की जगह मौजूद है, लेकिन उसका लाभ लेने के बजाय परिजन अस्पताल परिसर में भटकने और खुले बरामदों में रात गुजारने को विवश हैं।

मेडिकल कॉलेज में रोजाना सैकड़ों लोग मरीजों के उपचार के लिए पहुंचते हैं। उनके परिजनों के लिए रात्रि विश्राम, स्नान और शौचालय की सुविधाएं उपयोगी साबित नहीं हो रही हैं। परिसर में विश्रामगृह तो बना है, लेकिन सुनसान स्थान, बढ़ी हुई झाडिय़ों और साफ-सफाई के घोर अभाव के कारण परिजन वहां जाने से कतराते हैं। इस कारण कई लोगों को वार्ड के बाहर बरामदों में ही दिन-रात गुजारनी पड़ती है, जिससे उन्हें काफी असुविधा होती है।

मर्चुरी के पीछे सुनसान विश्रामगृह-स्नानगृह-शौचालय
सैलाना रोड मेडिकल कॉलेज में रात्रि विश्राम और शौचालय-स्नानगृह मर्चुरी के पीछे बना रखें हैं। मरीजों के परिजनों के अनुसार जहां पर दिन में जाने में भय लगता हैं। रात कैसे गुजारे और कई लोगों को तो पता भी नहीं है कि मरीजों के परिजनों के लिए रात्रि विश्रामगृह है कहां। कॉलेज में जहां महिला और पुरुषों के लिए व्यवस्था की गई हैं, वहां बड़ी-बड़ी घास और झाडिय़ां उगी हैं। कमरों में रखे पलंग-बिस्तरों पर धूल जम रही हैं। सुनसान माहौल के कारण दिन में भी लोग वहां जाने से बचते हैं।

स्नानगृह-शौचालय में प्लास्टर उखड़ा, दरवाजे झूले
विश्रामगृह के समीप बना रखें महिला-पुरुषों के लिए शौचालय एवं स्नानगृह का बोर्ड भी टूटकर लटका रहा है। जैसे यहां कोई महिनों से जिम्मेदार अधिकारी आया तक नहीं हैं। शौचालयों में नल और पाइप जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी से भी परेशानी होती है। दीवारों से प्लास्टर उखड़ा है तो दरवाजा के नकुचों ने जगह छोड़़ दी हैं।

परिजनों की जुबानी परेशानी

  • दिनेश गामड़ ने बताया कि उन्हें विश्रामगृह की जानकारी ही नहीं थी। इसलिए वार्ड के सामने ही रात गुजारनी पड़ी। ऐसी जगह सुविधाएं विकसित की जाएं, जहां महिलाएं भी सुरक्षित महसूस करते हुए उनका उपयोग कर सकें। झाडिय़ों की कटाई हो और स्नानगृह व शौचालयों की व्यवस्थाएं सुधारी जाएं।

अकेली महिला के लिए जाना मुश्किल

  • पंकज वर्मा ने बताया कि स्नान करने की जगह पीछे बताई गई थी, लेकिन सुनसान और घास से घिरे स्थान पर जाने में डर लगा। अकेली महिला के लिए वहां जाना और भी मुश्किल है। जिम्मेदारों को चाहिए कि विश्रामगृह की नियमित सफाई कराई जाए।
Updated on:
14 Oct 2026 10:27 pm
Published on:
14 Oct 2026 10:15 pm