
रतलाम। मौसम विभाग के अलर्ट के साथ ही रतलाम में दो दिन से फिर मानसूनी बारिश सक्रिय हो गई, जिले का आठों विकासखंडों में कहीं तेज तो कहीं रिमझिम बारिश ने तरबतर किया। रविवार पूरे दिन रिमझिम और तेज बारिश का दौर शहर में जारी रहा। सोमवार को भी मौसम विभाग के अनुसार ऐसे दिन निकलने वाला हैं।
मानसूनी बारिश ने सितंबर माह के दूसरे सप्ताह में फिर तरबतर कर दिया। शहर में सुबह से गरज चमक के साथ रूक रूककर बरस रही बौछारों के चलते अब तक 27 इंच वर्षा रतलाम में हो चुकी है, इससे जिले की औसत वर्षा की स्थिति में भी सुधार होते हुआ आंकड़ा 22 इंच के करीब पहुंच गया।
खरीफ फसल को लेकर किसानों में राहत
राहगीर भीगते हुए सफर करते नजर आए। गणपति बप्पा के पांडाल तरबतर तो कहीं मूर्ति विक्रेता भी परेशान होते रहे। किसानों ने बारिश से राहत पाई, क्योंकि मुरझाती सोयाबीन, मक्का, कपास की फसल में पानी की काफी आवश्यकता था, अब खरीफ फसल की चिंता दूर हुई, लेकिन फिर भी रबी सीजन के लिए पर्याप्त बारिश नहीं हैं।
बाजना में सबसे कम बारिश
भू अभिलेख शाखा से मिली जानकारी के अनुसार रविवार सुबह 8 बजे तक 18.13 मिमी औसत वर्षा जिले में दर्ज की गई। अब तक 533 मिमी बारिश हो चुकी हैं, जबकि गत वर्ष 1198 मिमी हो चुकी थी। जिले में सबसे कम बाजना में मात्र 352 मिमी वर्षा हुई हैं। जबकि सर्वाधिक बारिश 684 मिमी आलोट में दर्ज की गई।
सुबह से शाम में 20 मिमी बरसा
शहर में जोरदार बारिश का दौर शुरू हो चुका हैं। रविवार सुबह से शाम तक 20 मिमी बारिश दर्ज की गई। देर शाम तक रिमझिम तो कभी तेज बौछारों का सिलसिला जारी था। दिन का तापमान 30.6 डिग्री और रात का 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
कीट नियंत्रण के लिए ये करें उपाय
कृषि विज्ञान केंद्र, रतलाम ने सोयाबीन फसल में वर्तमान मौसम को देखते हुए किसान भाइयों के लिए महत्त्वपूर्ण सलाह जारी की है। केंद्र ने किसानों से विभिन्न कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी करने और प्रकोप दिखाई देने पर समय पर नियंत्रण उपाय अपनाने का अनुरोध किया है। प्रमुख कीटों में फली छेदक, तम्बाकू की इल्ली, बिहार हेयरी कैटरपिलर और तना मक्खी व सफेद मक्खी शामिल हैं। नियंत्रण के लिए इंडोक्साकार्ब, क्लोरेंट्रानिलिप्रोल, एमामेक्टिन बेंजोएट जैसे रसायनों के छिडक़ाव की सिफारिश की गई है। रोगों में राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट, एन्थ्रेक्नोज और पीला मोजेक/सोयाबीन मोजेक प्रमुख हैं। इनके नियंत्रण हेतु फ्लक्सापायरोक्साड, टेबुकोनाजोल, कार्बेन्डाजिम जैसे फफूंदनाशकों के उपयोग की सलाह दी गई है।