
रतलाम। शरीर को स्वस्थ और निरोगी रखना है तो बस इन साधारण से टिप्स को ध्यान में रखो और नियमित रूप से कर लो...चमत्कारिक परिणाम सामने आएंगे। क्योंकि रसायन युक्त सौंदर्य प्रसाधनों ने हमारे चेहरे और स्वास्थ्य को बहुत नुकसान पहुंचाया है, इनसे दूर रहे। नहाते समय तलवे को पत्थर से अच्छी तरह रगड़े, तलवा जितना चमकेगा, चेहरा भी उतना ही दमकेगा। वर्तमान में भारत का ठिकरा (पत्थर) अमेरिका ठाकुर बन गया है, जहां लोग तलवे को रगड़ कर साफ करने का तरीका आजमा रहा है, जबकि यह हमारे देश का पुराना पारंपरिक तरीका है, इसे सभी अपनाएं। यह बात अरूण ऋषि स्वर्गीय के जो उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक की रतलाम मुख्य शाखा के तत्वावधान में आयोजित स्वास्थ्य जागरूकता व्याख्यान में कही।
नंगे पैर चलना और ताली बजाना एक्यूप्रेशर की प्राकृतिक
कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्य प्रबंधक रतलाम मुख्य शाखा पीयूष विजयवर्गीय ने अतिथि अरूण ऋषि, क्षेत्रीय प्रबंधक हरिसिंह दलोदिया, अधिकारी संगठन के क्षेत्रीय सचिव राजेश तिवारी का पुष्पहारों से स्वागत किया। अतिथि ऋषि ने कहा कि पहले श्रद्धालु नंगे पैर मंदिर जाते थे। प्रार्थना-आरती के दौरान ताली बजाते थे, लेकिन आधुनिकता और दिखावे की अंधी दौड़ में आज लोगों को इसमें शर्म आती है। इसी कारण बीमारियां बढ़ रही है, जबकि नंगे पैर चलना और ताली बजाना एक्यूप्रेशर की प्राकृतिक विधि है।
चाय ने भारत को बर्बाद कर दिया
उन्होंने कहा चाय ने भारत को बर्बाद कर दिया है, यहां के लोग रोजाना 800 करोड़ रूपये की चाय पी जाते है। चाय सेहत पर बुरा असर करती है। उन्होंने हास्य की चुटकी लेते हुए बहुत गहरी बात कही। उन्होंने कहा कि आज कल हर कोई तनाव में है, जिसके साथ शन और नाव जुड़ गया, समझो तनाव बढ़ गया। जैसे चुनाव, बनाव, मनाव, पहचान, सुनाव आदि। इसी तरह बच्चे के जन्म से मरण तक शन से जुड़े शब्द तनाव देते है। जन्म से पहले इंजेक्शन, इसके बाद सेलिब्रेशन, एडमिशन, एजुकेशन, ग्रेजुएशन, प्रोफेशन, ऑपरेशन और में क्रेमेशन।
देशी उपाय से लोगों को निरोग रहने की दी सीख
अरूण ऋषि ने शुद्ध देशी उपाय से लोगों को निरोग रहने की सीख दी। उन्होंने हाथ की पांचों उंगलियों की व्याख्या की। अंगूठे को ऊर्जा, तर्जनी को विध्वंसक, मध्यमा को घाव भरने वाला, अनामिका को तनाव से राहत देने वाला और कनिष्ठिका को मूत्र विकार दूर करने वाले बताया। सिर के दर्द मलम से नहीं मध्यमा उंगली के स्पर्श से ठीक होता है। तनाव होने पर अनामिका उंगली को पानी में डाले और ललाट के मध्य भाग को पांच मिनिट तक स्पर्श करें। ऐसा करने के मूत्र रोग से राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि हममे से हर कोई साफ पानी पीता है और सफाई से रहता है, इसके बावजूद बीमारियां बढ़ती जा रही है। दूसरी तरह जानवर गंदा पानी पीकर बिना किसी विशेष सावधानी के रहकर भी रोग ग्रस्त नहीं होते है। उन्होंने बताया कि इसकी वजह है कि जानवरों का रोग प्रतिरोधक संस्थान बेहत बलशाली होता है, क्योंकि उनके पंजों के पाइंट कंकर पत्थर से दबते रहते है। यह एक्यूप्रेशर का सिद्धांत है। संचालन एसएस नारंग ने किया व अंत में आभार मुख्य प्रबंधक, कलेक्टोरेट रतलाम पंकज गुप्ता ने व्यक्त किया।
ऋषि ने दिए सेहत के टिप्स
- नहाते समय तलवों को पत्थर, खपरैल या झावा से खूब रगड़े, जितना तलवा साफ होगा, चेहरा उतना ही दमकेगा।
- पूरे दिनभर में शाकाहरी कम से कम दो बार और मांसाहारी कम से कम से 5 बार नमाज की मुद्रा में (वज्रासन) में बैठे। हाजमा कभी नहीं होगा।
- टूथपेस्ट की जगह नमक व सरसों तेल का पेस्ट लेकर मध्यमा उंगली से मंजन करें। शुरूआती 5 दिन इस पेस्ट में हल्दी पावडर भी मिला लें। दांतों की परेशानी कभी नहीं होगी।