
रतलाम । प्रदेश कॉलेजों में विद्यार्थियों को बंटने वाले स्मार्ट फोन में 80 करोड़ रुपए के घोटाल का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। प्रदेश की शिवराज सरकार की ओर से बांटे जाने वाले स्मार्ट फोन के घटिया होने का मामला कैबिनेट में उठा है। इससे करीब दो माह पूर्व रतलाम के पूर्व महापौर पारस सकलेचा ने इस मामले की ईओडब्ल्यू से शिकायत की थी, कई दस्तावेज भी सौंपे थे। स्मार्ट फोन वितरण में 80 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया था। मामला कैबिनेट में उठने के बाद सकलेचा एक बार फिर अपने आरोप दोहराने लगे हैं। प्रदेश सरकार के मंत्री भी फोन के घटिया होने की विधानसभा में कह रहे हैं। कैबिनेट में यह मामला प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह ने उठाया था। विद्यार्थी भी सरकारी फोन को घटिया बता रहे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि फोन एक बार खराब हो रहे हैं तो बनने का नाम ही नहीं ले रहे हैं।
मंत्रियों ने उठाए सवाल, बोले मेमोरी कम है
मध्य प्रदेश विचार मंच के पारस सकलेचा ने इस मामले में करीब दो महीने पहले ईओडब्ल्यू में शिकायत की थी, उसमें फोन के घटिया होने और आपूर्ति करने वाली कंपनी के फर्जी होने के साथ ८० करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया था। पिछले दिनों कैबिनेट बैठक में मंत्री विजय शाह ने कहा, छात्रों को घटिया दर्जे के स्मार्ट फोन दिए गए हैं। इसकी कंपनी बदलना चाहिए। इस बीच राज्यमंत्री दीपक जोशी ने कहा, स्मार्ट फोन की जगह टैबलेट क्यों नहीं दिए जा सकते। ये ज्यादा उपयोगी होंगे। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा, कौन सा फोन दंे, इसका प्रस्ताव अभी कैबिनेट में नहीं आया है। अभी स्मार्ट फोन योजना को निरंतर रखने की मंजूरी का प्रस्ताव है। कौन सा फोन बांटेंगे, इस पर बाद में निर्णय करेंगे। इस बीच जोशी ने कहा कि जो स्मार्ट फोन छात्रों को दिए जा रहे हैं, उनकी मेमोरी भी कम है।
यह है पारस के आरोपों का पुलिंदा
अब मंत्री शाह के आरोप के बाद सकलेचा ने अपने दावे को और पुष्ट बताया है। कैबिनेट में मामला उठाए जाने के बाद सकलेता ने कहा कि हम तो पहले से ही फोन घटिया होने के बात कह रहे थे, अब सरकार के मंत्री भी फोन को घटिया बताने लगे हैं। सकलेचा ने बताया कि मंच ने करीब छह माह अध्ययन के बाद ईओडब्ल्यू को शिकायत की थी, जिसमें कई प्रमाण भी सौंपे थे। अब मंत्री ने फोन के घटिया होने के आरोप लगा दिए हैं। मंत्री शाह के आरोप से सरकार सकते में है। ईओडब्ल्यू को की गई शिकायत में मंच ने २५ अक्टूबर में आरोप लगाया था कि जिस कार्वे डेटा मैनेजमेंट कंपनी को यह टेंडर दिया गया है, वह टेंडर की शर्तों को पूरा ही नहीं कर रही है। जिस चीनी कंपनी फोरस्टार इंडस्ट्री लिमिटेड का 200 करोड़ सालाना टर्नओवर की कंपनी बताया जा रहा है। उस कंपनी का कोई पता ही नहीं है। यहां तक कि उसकी कोई वेबसाइट भी नहीं है। हालांकि इस मामले में अभी ईओडब्ल्यू ने बयान दर्ज नहीं किए हैं लेकिन सकलेचा ने दावा किया है कि उनके आरोप तथ्यात्मक रूप से सत्य हैं।
दो माह में स्मार्ट फोन बन गए डिब्बा
उच्च शिक्षा विभाग ने पिछले साल कॉलेज में विद्यार्थियों को बांटे स्मार्ट फोन की स्मार्टनेस यह है कि एक या दो माह से ज्यादा चले ही नहीं। जिनके पास ये मोबाइल चल रहे हैं उनकी हालत यह है कि इंटरनेट चलाएं तो हर दो घंटे में बैटरी चार्ज करना पड़े और केवल फोन कॉलिंग पर रखे तो छह-आठ घंटे बाद फिर से चार्ज करना पड़ जाए। दिनभर इंटरनेट चलाने वाले विद्यार्थियों को ये फोन रास नहीं आए हैं। ज्यादातर ने तो इन्हें औने-पौने दामों में बैचकर दूसरे इससे ऊंची किस्म के मोबाइल फोन ले लिए हैं। जो ऐसा नहीं कर पाए हैं वे इन्हीं जैसे-तैसे चला रहे हैं। प्रदेश सरकार के मंत्री ने इन मोबाइल की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए तो इसके बाद पत्रिका ने स्मार्ट फोन प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से चर्चा की। इसमें साफतौर से निकलकर आया कि वास्तव में स्मार्ट फोन की गुणवत्ता कम है।
कॉलेज स्टॉफ ने भी उठाए थे सवाल
कॉलेजों में जब विद्यार्थियों को स्मार्ट फोन वितरित किए गए थे तो उनकी गुणवत्ता को देखकर कॉलेज स्टॉफ ने भी सवाल खड़़े किए थे किंतु वे सरकारी कर्मचारी होने की वजह से बोल नहीं पाए न ही विरोध कर पाए। विद्यार्थियों को नए फोन मिलने से वे खुश थे किंतु अब जाकर उन्हें पता चला कि ये स्मार्ट फोन किसी काम के नहीं हैं। इनके फीचर, रैम और इसे देखते ही पता चलता है कि ये स्मार्ट फोन केवल नाम के स्मार्ट हैं।
हर घंटे में चार्ज करना पड़ता
कोई भी एप्लीकेशन डाउन लोड करने जाओ तो इतना वक्त लगता है कि बैटरी ही बैठ जाती है। कैसे इन फोन को चलाएं। इससे तो केवल कॉलिंग के लिए ही उपयोग करना बेहतर है। हर एक घंटे में तो इसे चार्ज करना पड़ता है। न बैटरी में ज्यादा पॉवर है और न ही इसकी रेम ऐसी है कि उसमें ज्यादा फोटो या सामग्री रखी जा सके। बस जैसे-तैसे उपयोग कर रहे हैं।
इरशाद खान, बीएससी पांचवां सेमेस्टर
दूसरा मोबाइल फोन खरीदना पड़ा
कॉलेज में मिला स्मार्ट फोन तो केवल नाम मात्र के लिए ही था। शुरुआत में कुछ माह ठीक से उपयोग किया लेकिन बाद में उसकी हालत ऐसी नहीं रही कि उसे लगातार उपयोग किया जा सके। इसके लिए दूसरा मोबाइल फोन खरीदना पड़ा। अब तो यह मोबाइल केवल डिब्बा ही कहा जा सकता है क्योंकि इसका कोई उपयोग कर ही नहीं पा रहे हैं।
भेरु जमड़ा, बीएससी पांचवां सेमेस्टर