
रतलाम. चातुर्मास की तिथियां नजदीक आते हैं, जैन संत-साध्वीवृंद का शहर में प्रवेश शुरू हो चुका हैं। रविवार सुबह साध्वी प्रफुल्ला आदि ठाणा पांच का रतलाम में प्रवेश हुआ। उन्होंने चातुर्मास को आराधना और आत्मसुधार का अवसर में '5जी' के सिद्धांत से चातुर्मास का महत्व समझाते हुए कहा कि पहला 'जी' गुरु है, जिनकी उपस्थिति चातुर्मास में होती है।
दूसरा 'जी' उदारता है, जिसके तहत हमें उदारता रखनी है। तीसरा 'जी' 'गिव एंड टेक' है, जहां गुरु जिनवाणी देंगे और श्रद्धालु प्रतिदिन एक घंटा समय देंगे। चौथा 'जी' लक्ष्य तय करना है, जैसे एक सामयिक से दो सामयिक का लक्ष्य बनाना।
ðपांचवां 'जी' गुरु का आशीर्वाद है, जो जीवन पर बना रहे। उन्होंने कहा कि इन चार महीनों में प्रतिदिन केवल एक घंटा गुरु को देना है। द्वि शतावधानी महती ने कहा कि यह चातुर्मास हमें गुरु से संबंध जोडऩे और अपनी गलतियों को सुधारने का अवसर देता है। गुरु से संबंध स्थापित करते हुए अपनी भूलों को सुधारना ही इस चातुर्मास का लक्ष्य है।
भगवान महावीर के लगाए नारे
श्रीसंघ मीडिया प्रभारी नीलेश बाफना ने बताया कि महासती वृंद का रतलाम शहर में चातुर्मास के लिए मंगल प्रवेश सुबह 9 बजे संघ के वरिष्ठ मि_ूलाल खेमसरा के निवास से शुरू हुआ। यह नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए नीमचौक जैन स्थानक पर धर्मसभा में परिवर्तित हुआ। इस अवसर पर प्रमुख समाज जन उपस्थित थे, जिन्होंने भगवान महावीर और जैन दिवाकर के नारों से प्रवेश को मंगलमय बनाया।
चातुर्मास के महत्व पर प्रकाश डाला
श्रीसंघ अध्यक्ष अजय खमेसरा ने स्वागत भाषण में चातुर्मास की रूपरेखा प्रस्तुत की। संघ गौरव महेंद्र बोथरा ने इस अमूल्य चातुर्मास के महत्व पर प्रकाश डाला। युवा अध्यक्ष आशीष कटारिया ने युवा मंडल की ओर से चातुर्मास को सफल बनाने में पूर्ण सहयोग का आश्वासन श्रीसंघ और महासती को दिया। धर्मसभा में रक्षिता पटवा, बहू मंडल की रीना गांधी और साथीगण, पिस्ता कटारिया, सुशीला बाफना, मंजू और अन्य ने स्वागत गीत प्रस्तुत किए।