
रतलाम। वट पूर्णिमा 27 जून को है। इस दिन भगवान विष्णु व लक्ष्मी की आरधना की जाती है। जो भक्त इस दिन व्रत रखकर राशि अनुसार दान करता है, उस पर भगवान विष्णु लक्ष्मी संग आकर कृपा करते है। ये बात केरल की ज्योतिष परंपरा तंडी ज्योतिष के जानकार रतलाम के प्रसिद्ध ज्योतिषी वीरेंद्र रावल ने बुधवार को इंद्रा नगर स्थित सांई मंदिर में भक्तों को कही। वे वट पूर्णिमा का महत्व व राशि अनुसार दान के बारे में बता रहे थे।
ज्योतिषी रावल ने कहा कि वर्ष में 12 पूर्णिमा आती है। पूर्णिमा का सीधा संबंध भगवान विष्णु की आराधना से है। इस दिन भक्ति भाव के साथ व्रत करके दान किया जाए तो हर मनोकामना पूरी होती है। आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि को वट पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन पूर्णिमा का व्रत, पूजा विधि, व्रत कथा आदि के बारे में जानकारी लेकर पूजा आदि की जाती है। इस दिप वट वृक्ष की पूजन की जाती है।
इसलिए होती है वट की पूजा
असल में हिंदू सनातन परंपरा में वट वृक्ष की आस्था के साथ गहरी मान्यता है। वट एकमात्र एेसा वृक्ष है तो ब्रह्मा, विष्णु के साथ महेश का स्वरुप माना जाता है। इस दिप वट अर्थात बरगद के वृक्ष की पूजन करने से पति की लंबी आयु का आशिर्वाद तो मिलता ही है साथ ही जिनका विवाह न हो रहा हो उनको भी व्रत रखने से मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। इतना ही नहीं, नौकरी के लिए परेशान लोगों को तो ये पूर्णिमा सबसे अधिक लाभ देती है।
ये है वट पूर्णिमा शुभ मुहूर्त
वट पूर्णिमा शुरू सुबह 08.12 बजे 27/जून/2018
वट पूर्णिमा समाप्त सुबह 10.22 बजे 28//जून/2018
राशि अनुसार करें ये दान
मेष- दूध का संध्या के समय दान करें।
वृषभ- दही का संध्या के समय दान करें।
मिथुन- संध्या के समय पंचामृत का दान करें।
कर्क- संध्या के समय शहद का दान करें।
सिंह- संध्या के समय गाय को चारा खिलाएं।
कन्या- गणपति मंदिर में शाम को केले का दान करें।
तुला- परिवार की स्त्री को खीर शाम को खिलाएं।
वृश्चिक- लाल रंग के कपडे़ शाम को दान करें।
धनु- ज्ञान की पुस्तकों का शाम को दान करें।
मकर- काले रंग के कपड़ों का दान शाम को शिव मंदिर में करें।
कुंभ- तिल, लोहा के साथ दूध का शाम को दान करें।
मीन- पीले रंग की मिठाई का दान शाम को करें।