धर्म और अध्यात्म

Adhik Maas 2026: 33 कोटि देवी-देवताओं को समर्पित, जानें क्यों लगता है श्रीहरि को 33 मालपुओं का भोग

33 Malpua Daan Importance: शास्त्रों (पद्म पुराण) के अनुसार, अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में मालपुए के दान को 'अपूप दान' कहा जाता है। मान्यता है कि इस माह में विधि-विधान से किया गया यह दान 33 कोटि देवी-देवताओं को तृप्त करता है और पृथ्वी दान के समान पुण्य फल देता है।

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May 21, 2026
Adhik Maas 2026 dates : Adhik Maas में मालपुओं की बढ़ी डिमांड, गोनेर में एडवांस ऑर्डर बुक

Adhik Maas 2026, 33 Malpua Daan Importance: करीब 32 माह 16 दिन बाद हाल ही ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की शुरुआत हुई। पुरुषोत्तम मास में शहर में 20 से अधिक जगहों पर धार्मिक कथाओं के आयोजन के साथ ही विभिन्न अनुष्ठान होंगे। साथ ही दान-पुण्य का दौर भी चलेगा। सेवा कार्यों के साथ ही अलग-अलग समाजों व संगठनों की ओर से रोजाना बड़ी संख्या में परिंडे भी बांधे जाएंगे। साथ ही अधिक मास में एकादशी सहित अन्य विशेष तिथियों सहित पूरे माह श्रद्धालुओं द्वारा भगवान विष्णु को 33 मालपुओं का भोग लगाकर दान किया जाएगा। भोग अर्पित करते समय श्री हरि के 33 विभिन्न स्वरूपों (जैसे विष्णु, केशव, माधव, श्रीपति आदि) का ध्यान किया जाएगा।

अधिक मास में विष्णु सहस्र नाम व गीता पाठ करने का विशेष महत्व

मान्यता है कि 33 मालपुए 33 (33 Malpua Daan Importance) कोटि देवी-देवताओं को समर्पित होते हैं और इनके दान से पाप व दोषों का नाश होता है। पं.दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि इस माह में भगवान विष्णु की पूजा, विष्णु सहस्र नाम व गीता पाठ करने का विशेष महत्व है। जरूरतमंद लोगों को वस्त्र, फल, जल से भरे घड़े व अन्न का दान करना पुण्यकारी है। हालांकि, विवाह सहित मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा।

Adhik Maas में मालपुओं की बढ़ी डिमांड, गोनेर में एडवांस ऑर्डर बुक

गोनेर में अधिक मास के दौरान 30 से अधिक दुकानों पर मालपुए की बिक्री में 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का अनुमान है।
व्यापारी मुकेश तांबी ने बताया कि आम दिनों में 150 किलो मालपुओं की प्रतिदिन बिक्री (100 से लेकर 700 रुपए प्रति किलो) होती है। वहीं, अधिक मास शुरू होते ही भगवान विष्णु को अर्पित करने के लिए ऑर्डर बुक होना शुरू हो चुके हैं।

33 मालपुओं के दान की पूरी विधि क्या है?

सामग्री की तैयारी

    मालपुए: शुद्ध घी और गुड़ (या चीनी) से बने 33 मालपुए तैयार करें।

    पात्र (बर्तन): शास्त्रों के अनुसार, मालपुओं को कांसे के पात्र (बर्तन) में रखकर दान करना सबसे उत्तम माना गया है। यदि कांसा उपलब्ध न हो, तो सामर्थ्य अनुसार पीतल, स्टील या बांस की टोकरी का उपयोग कर सकते हैं।

    अन्य सामग्री: मालपुओं के साथ रखने के लिए सामर्थ्य अनुसार कुछ दक्षिणा (पैसे), पीले वस्त्र और ऋतु फल (जैसे केला, सेब आदि)।

    पूजन और भोग विधि

      शुभ समय: यह दान अधिक मास के दौरान किसी भी गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा या महीने के अंतिम दिनों में करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

      पूजा: सुबह जल्दी स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु/श्रीकृष्ण की विधिवत पूजा करें।

      भोग लगाना: कांसे के पात्र में 33 मालपुए सजाकर भगवान विष्णु के सम्मुख रखें और उन्हें तुलसी दल (तुलसी का पत्ता) चढ़ाकर भोग लगाएं।

      मंत्रोच्चार: भोग लगाते समय भगवान विष्णु के 33 स्वरूपों के नामों का ध्यान करें。 यदि नाम याद न हों, तो प्रत्येक मालपुए को अर्पित करते समय इस महामंत्र का जाप करें:

      "ॐ पुराण पुरुषोत्तमाय नमः"
      (इसके अलावा आप "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का भी जाप कर सकते हैं)।

      अधिक मास को भगवान श्रीकृष्ण ने क्यों दिया पुरुषोत्तम नाम?

      यह मास मनुष्य के प्रायश्चित के लिए सबसे बेहतर माना गया है। इस महीने को भगवान कृष्ण ने स्वयं अपना नाम दिया है। शास्त्रों के अनुसार स्वयं के कल्याण और अपने आप को बेहतर बनाने के लिए किया गया छोटा सा प्रयास भी सफलता के द्वार खोल देता है।
      पं. पुरुषोत्तम गौड़, ज्योतिषाचार्य

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      Published on:
      21 May 2026 07:17 pm
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