Significance of Akshaya Tritiya: अक्षय तृतीया 2026 का महत्व जानें। परशुराम जन्म, महाभारत रचना, नर-नारायण अवतार और दान के अक्षय फल से जुड़ी पौराणिक कथाएं पढ़ें।
Akshaya Tritiya 2026 : अक्षय तृतीया सनातन आस्था की वह उजली रेखा है, जो जीवन में अनंत शुभता और सौभाग्य का संचार करती है। आज देशभर में यह पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। 'अक्षय' का अर्थ है, जिसका कभी क्षय (विनाश) न हो। माना जाता है कि इस दिन किए गए दान व संकल्पों का फल अनंत काल तक रहता है। शुभ कर्मों का फल समय के साथ बढ़ता है, नष्ट नहीं होता। यह दिन कई अवतारी शक्तियों के प्राकट्य व महान कार्यों के शुभारंभ का संगम भी है।
(वीडियो सोर्स : @astroarunpandit)
अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। इन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, जिन्होंने अधर्म के विनाश के लिए जन्म लिया। पौराणिक कथाओं के अनुसार वे अमर माने जाते हैं और भीष्म व कर्ण जैसे महान योद्धाओं के गुरु रहे हैं।
मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के नर-नारायण अवतार का प्राकट्य हुआ था। सृष्टि में धर्म स्थापना व तप के प्रतीक। मान्यता है कि बद्रीनाथ धाम की दो पहाड़ियां इन्हीं के तप का स्थान हैं। द्वापर युग में इन्होंने 'कृष्ण और अर्जुन' के रूप में जन्म लिया।
भगवान विष्णु ने इसी दिन हयग्रीव अवतार लिया था। वेदों के रक्षक। जब मधु-कैटभ राक्षसों ने ब्रह्माजी से वेद चुरा लिए, तब विष्णुजी ने हयग्रीव अवतार में जन्म लेकर वेदों की रक्षा की। उन्होंने मधु-कैटभ का वध किया और ब्रह्माजी को उनके वेद सुरक्षित लौटाए।
इसी दिन महर्षि वेदव्यास ने गणेशजी को महाभारत सुनाना आरंभ किया। भगवान गणेश की शर्त थी कि वेदव्यास बोलते हुए नहीं रुकेंगे और वे लगातार लिखेंगे। इसी प्रण के साथ महाभारत की रचना हुई। यह ग्रंथ आज भी संसार को धर्म, कर्म व जीवन का मार्गदर्शन देता है।
मान्यता है कि अक्षय तृतीया के पावन दिन त्रेता युग का आरंभ हुआ। यह युग धर्म, सत्य और मर्यादा का प्रतीक माना जाता है। इसी युग में भगवान राम का अवतार हुआ, जिन्होंने आदर्श जीवन और न्यायपूर्ण शासन का मार्ग दिखाया।
सूर्य-चंद्रमा उच्च राशि में: सूर्य और चंद्रमा दोनों ही अपनी उच्च राशि में स्थित होते हैं। किसी भी कीमती वस्तु की खरीदारी के लिए सबसे उत्तम समय।
द्रौपदी को अक्षय पात्र: इसी दिन वनवास के समय द्रौपदी को सूर्य देव ने 'अक्षय पात्र' दिया, जिससे असीमित भोजन निकलता था। दान और सेवा का प्रतीक।
दूर हुई सुदामा की गरीबी: इसी दिन श्रीकृष्ण के मित्र सुदामा द्वारका पहुंचे। सच्ची मित्रता निभाते हुए कृष्ण ने दो मुट्ठी चावल के बदले मित्र की गरीबी दूर कर दी।
नई फसल लाने का दिन: रबी की फसलें पककर तैयार हो जाती हैं। नई उपज घर लाने, अनाज की पूजा करने व ईश्वर का आभार व्यक्त करने का दिन।