Baglamukhi Jayanti 2026 : मां बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल 2026 पर जानिए पूजा का महत्व, सही समय, चमत्कारी उपाय और कैसे यह दिन शत्रुओं, कोर्ट केस और मानसिक तनाव से मुक्ति दिला सकता है।
Baglamukhi Jayanti 2026 : क्या आपने कभी सोचा है कि जब मेहनत के बाद भी काम न बने, कोर्ट-कचहरी के चक्कर खत्म न हों या कोई अनजाना डर आपको आगे बढ़ने से रोक दे, तो क्या करना चाहिए? अध्यात्म की दुनिया में एक ऐसी शक्ति है जिसे स्तंभन की देवी कहा जाता है। वह शक्ति जो चलते हुए समय को रोक सकती है और बिगड़ी हुई तकदीर को थाम सकती है मां बगलामुखी।
यह कहानी त्रेतायुग की है। रावण केवल बलशाली नहीं था, वह तंत्र-मंत्र और वेदों का महापंडित भी था। जब युद्ध में उसकी मायावी शक्तियों को काटना असंभव होने लगा, तब भगवान श्री राम ने मां बगलामुखी की शरण ली। उन्होंने मां को प्रसन्न करने के लिए पीले फूलों और हल्दी से उनका अभिषेक किया। परिणाम? रावण की बुद्धि और तंत्र विद्या स्तंभित (रुक) हो गई और राम जी की विजय का मार्ग प्रशस्त हुआ।
इस साल 24 अप्रैल को मां बगलामुखी जयंती मनाई जा रही है। 10 महाविद्याओं में से आठवीं स्वरूप मां बगलामुखी की साधना के लिए यह साल का सबसे बड़ा दिन है।
पीला रंग ही क्यों? पीला रंग स्थिरता और शांति का प्रतीक है। मां को पीतांबरा भी कहा जाता है। हल्दी और पीले वस्त्रों से उनकी पूजा करने पर मन के विचार शांत होते हैं और जीवन में ठहराव आता है।
निशीथ काल का जादू: इस दिन आधी रात का समय (निशीथ काल) सबसे शक्तिशाली होता है। मान्यता है कि इस समय की गई पूजा कोर्ट केस से मुक्ति और शत्रुओं के षड्यंत्र को पूरी तरह खत्म कर देती है।
अगर आप साक्षात मां की शक्ति को महसूस करना चाहते हैं, तो भारत में दो प्रमुख स्थान हैं:
पीतांबरा पीठ, दतिया (मप्र): यहां इस जयंती पर 21 किलो हल्दी से विशेष हवन होगा। यह हवन नजर दोष और शत्रु बाधा दूर करने के लिए अचूक माना जाता है।
नलखेड़ा, उज्जैन: यहां के प्राचीन मंदिर का संबंध लक्ष्मण जी से माना जाता है। यहाँ आज भी त्रेतायुग की ऊर्जा महसूस की जा सकती है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई मंदिर नहीं पहुंच सकता। लेकिन आपकी श्रद्धा में कमी न आए, इसके लिए 'श्री मंदिर' ऐप एक बेहतरीन सेतु बना है।
खास जानकारी: इस बार श्री मंदिर के माध्यम से 36 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा 1000 किलो लाल मिर्च का महायज्ञ और 12 लाख से अधिक मंत्रों का जाप किया जा रहा है।
नाम और गोत्र से पूजा: आप कहीं भी हों, आपके नाम और गोत्र के साथ यह अनुष्ठान संपन्न होगा।
अभिमंत्रित सामग्री: पूजा के बाद हरिद्वार के मंदिर से अभिमंत्रित यंत्र, हल्दी माला और रक्षा सूत्र सीधे आपके घर भेजे जाएंगे।
अक्सर लोग समझते हैं कि बगलामुखी सिर्फ शत्रुओं के लिए हैं। लेकिन सच यह है कि मां हमारी इंद्रियों को लगाम देती हैं। अगर आप ओवरथिंकिंग (ज्यादा सोचने) या गुस्से के शिकार हैं, तो मां की आराधना आपकी मानसिक उथल-पुथल पर पॉज बटन दबा देगी।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।