
Devshayani Ekadashi 2026 Vrat Niyam- देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास (Chaturmas) की शुरुआत होती है, जिसे सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र समय माना गया है। इस अवधि में भगवान विष्णु और शिव दोनों की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस दौरान व्रत, जप, अभिषेक, भागवत कथा श्रवण और दान करने से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है। साथ ही एकादशी व्रत के दौरान कुछ ऐसे नियम भी बताए गए हैं, जिनका पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य धर्मेंद्र शास्त्री से जाने पूजा, दान और व्रत से जुड़े अहम नियम।चातुर्मास में पूजा और ध्यान करने का विशेष महत्व है। देवशयनी एकादशी से देवप्रबोधनी एकादशी तक भगवान विष्णु विश्राम करेंगे। इस दौरान शिवजी सृष्टि का संचालन करेंगे। इन दिनों में शिवजी और विष्णुजी की पूजा करनी चाहिए।
ज्योतिषाचार्य शास्त्री बताते है कि देवशयनी एकादशी व्रत करने से पूरे साल की 26 एकादशीयो का पुण्य एक साथ मिलता है। प्रत्येक महीने में 2 बार एक कृष्णपक्ष व दूसरी शुक्लपक्ष में दोनों ही एकादशियो का भिन्न-भिन्न महत्व हमारे पुराणों एवं धर्मग्रंथों में बताया गया है।
भक्त एकादशी का व्रत करते है उनको दशमी से लेकर द्वादशी तक कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन अनिवार्य रूप से करना चाहिए।
पदम् पुराण के उत्तर खंड के अनुसार,