धर्म और अध्यात्म

Dol Purnima 2026: डोल पूर्णिमा 2026: चंद्रग्रहण के दिन भगवान जगन्नाथ का अनोखा रूप, रात 8-9 बजे खुलेगा सुना भेष

Dol Purnima 2026: डोल पूर्णिमा 2026: पुरी में भगवान जगन्नाथ का 138 गहनों वाला राजराजेश्वर वेश, चंद्रग्रहण के बीच विशेष दर्शन

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Mar 03, 2026
Dol Purnima 2026
Dol Purnima 2026 : पुरी जगन्नाथ मंदिर में डोल पूर्णिमा का महोत्सव: 138 आभूषणों से होगा भगवान का राजतिलक जैसा श्रृंगार (फोटो सोर्स: Gemini AI)

Dol Purnima 2026: डोल पूर्णिमा, यानी फाल्गुन महीने की पूर्णिमा, हिंदू धर्म में बेहद खास मानी जाती है। इस बार ये त्योहार 3 मार्च 2026 को पड़ेगा। डोल पूर्णिमा का सबसे बड़ा आकर्षण है डोल यात्रा। इस दिन भगवान जगन्नाथ को मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकाला जाता है, उन्हें शानदार पालकी में बैठाकर पूरे नगर में घुमाया जाता है। आखिर में भगवान को डोल मंडप यानी झूले पर बिठाया जाता है। खास बात ये है कि आज के दिन भगवान जगन्नाथ को 138 तरह के सोने के गहनों से सजाया जाता है। चलिए, जानते हैं इस खास दिन की मान्यताएं और परंपराएं।

138 गहनों से भगवान का शाही श्रृंगार

पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर डोल पूर्णिमा पर पूरी तरह रंगों और भक्ति से जगमगा उठता है। इस मौके पर भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा सोने के खास वेश में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसे राज राजेश्वर वेश कहते हैं ये भगवान की शाही सत्ता और दैवीय ताकत का प्रतीक है।

भगवान का श्रृंगार किसी राजा के राजतिलक से कम नहीं

इस दिन भगवान को करीब 138 तरह के सोने के गहनों से सजाया जाता है। इनमें सोने के हाथ, पैर, मुकुट, कान की बालियां, कंठी माला, बाहुटी, राल कौरह और कई प्राचीन आभूषण होते हैं। सोचिए, इन गहनों का कुल वजन 200 किलो से ज्यादा बैठता है। इस नजारे को देखने के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं।

ग्रहण काल और विशेष दर्शन

3 मार्च को चंद्रग्रहण भी लगेगा। ज्योतिष के हिसाब से ग्रहण दोपहर 2:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक रहेगा। ग्रहण के नियमों की वजह से भगवान का सुना भेष रात 8 से 9 बजे के बीच ही दर्शन के लिए खुलेगा।

डोल पूर्णिमा की अनोखी परंपरा

जगन्नाथ संस्कृति के जानकार पंडित पद्मनाथ त्रिपाठी शर्मा बताते हैं कि ये त्योहार भगवान की 12 मुख्य यात्राओं की शुरुआत भी है। जहां पूरे देश में होली पर राधा-कृष्ण की पूजा होती है, वहीं पुरी के श्रीमंदिर में डोल गोविंद, भूदेवी और श्रीदेवी की खास पूजा होती है। भगवान की उत्सव मूर्तियां गर्भगृह से बाहर लाकर झूले पर विराजमान की जाती हैं। भक्त अबीर-गुलाल उड़ाते हैं, भगवान के साथ होली का आगाज करते हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

Published on:
03 Mar 2026 10:56 am