
Hindu Nav Varsh 2026: 19 मार्च से शुरू हो रहा विक्रम संवत 2083 इस बार कई मायनों में खास रहने वाला है, क्योंकि यह साल 13 महीनों का होगा। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाला यह नव संवत्सर देशभर में अलग-अलग नामों से उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन से नए शुभ कार्यों की शुरुआत, पूजा-पाठ और सकारात्मक ऊर्जा का संचार माना जाता है। साथ ही इस वर्ष ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति देश-दुनिया और राशियों पर खास प्रभाव डालने वाली है।
आमतौर पर हिंदू पंचांग 12 महीनों का होता है, लेकिन जब चंद्र और सूर्य गणना में अंतर बढ़ जाता है, तब उसे संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इस वर्ष ज्येष्ठ माह दो बार आएगा, जिससे कुल 13 महीने बनेंगे।अधिकमास 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समय पूजा-पाठ, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। लोग इस दौरान तीर्थ, व्रत और जप-तप में विशेष रुचि लेते हैं।
गुरु के राजा होने से समृद्धि के संकेत मिलते हैं। अच्छी वर्षा, बेहतर कृषि उत्पादन और समाज में सकारात्मकता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। धार्मिक गतिविधियों में भी वृद्धि देखने को मिल सकती है।
मंगल के मंत्री होने से कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं। कुछ क्षेत्रों में बारिश कम हो सकती है, जिससे महंगाई बढ़ने के संकेत हैं। इसके अलावा तनावपूर्ण माहौल और अग्नि या दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रह सकती है।
चंद्रमा के सेनाधिपति होने से शासन व्यवस्था में संतुलन रहने की उम्मीद है। आम लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो सकता है और दुग्ध उत्पादन जैसे क्षेत्रों में वृद्धि संभव है।
यह साल नई शुरुआत लेकर आ सकता है। लंबे समय से अटके काम पूरे होंगे और करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे।
तुला राशि वालों के लिए सम्मान और पहचान बढ़ने का समय है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और रुका हुआ धन वापस मिलने के योग हैं।
गुरु के प्रभाव से यह साल पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिला सकता है। आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी होगी।
मकर राशि के लोगों के लिए यह साल निवेश और संपत्ति के लिहाज से अच्छा रहेगा। घर, जमीन या वाहन खरीदने का सपना साकार हो सकता है।