Holika Dahan 2026 Date Time : रंगों वाली होली से ठीक एक दिन पहले वाली वह शाम, जब आसमान में चांद पूरा होता है और गली के चौराहे पर लकड़ियों का ढेर सजना शुरू हो जाता है जी हां, हम बात कर रहे हैं होलिका दहन की। साल 2026 में यह पावन पर्व 2 मार्च […]
Holika Dahan 2026 Date Time : रंगों वाली होली से ठीक एक दिन पहले वाली वह शाम, जब आसमान में चांद पूरा होता है और गली के चौराहे पर लकड़ियों का ढेर सजना शुरू हो जाता है जी हां, हम बात कर रहे हैं होलिका दहन की। साल 2026 में यह पावन पर्व 2 मार्च को मनाया जा रहा है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि होलिका दहन केवल आग जलाने की रस्म नहीं है? यह उत्सव है उस अटूट विश्वास का, जहां धधकती आग भी भक्त प्रहलाद का बाल भी बांका नहीं कर पाई।
हिंदू पंचांग के अनुसार, होलिका दहन हमेशा फाल्गुन मास की पूर्णिमा को प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, सही मुहूर्त में किया गया दहन सुख-समृद्धि लाता है।
| शहर | शुभ मुहूर्त (शाम) | शहर | शुभ मुहूर्त (शाम) |
| दिल्ली/नोएडा | 06:39 से 09:00 तक | मुंबई | 06:44 से 09:11 तक |
| लखनऊ | 06:30 से 08:51 तक | जयपुर | 06:29 से 08:57 तक |
| पटना | 05:52 से 08:20 तक | कोलकाता | 05:41 से 08:08 तक |
| बेंगलुरु | 06:29 से 08:54 तक | अहमदाबाद | 06:43 से 09:11 तक |
| भोपाल | 06:24 से 08:51 तक | वाराणसी | 06:39 से 09:00 तक |
होलिका दहन की कहानी हमें याद दिलाती है कि अहंकार चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, ईश्वर की भक्ति के सामने टिक नहीं पाता। असुर राजा हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका (जिसे आग में न जलने का वरदान था) के साथ मिलकर अपने ही बेटे प्रहलाद को जलाने की कोशिश की।
लेकिन चमत्कार हुआ! भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद सुरक्षित रहे और होलिका उसी आग में भस्म हो गई। आज भी दहन के समय बीच में एक लकड़ी गाढ़ी जाती है जिसे 'प्रहलाद' का प्रतीक मानकर आग की लपटों से सुरक्षित निकाल लिया जाता है।
राख का वैज्ञानिक महत्व: आयुर्वेद के अनुसार, वसंत ऋतु के आगमन पर वातावरण में बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं। होलिका दहन की अग्नि से निकलने वाली गर्मी (लगभग 50-60 डिग्री सेल्सियस) और उसमें डाली जाने वाली औषधियां वातावरण को शुद्ध करती हैं।
नई फसल का उत्सव: कई राज्यों में किसान अपनी नई फसल (जैसे गेहूं की बालियाँ और चना) को इस पवित्र अग्नि में भूनते हैं और उसे 'प्रसाद' के रूप में बांटते हैं।
बुरी नजर से बचाव: पुरानी मान्यताओं के अनुसार, होलिका की राख को माथे पर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है और स्वास्थ्य लाभ होता है।