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Holika Dahan Muhurat 2026: भद्रा और चंद्र ग्रहण का साया, जानें होलिका दहन के लिए क्यों मिलेंगे सिर्फ 12 मिनट

Holi 2026 Date and Time : वर्ष 2026 में होली पर भद्रा और खग्रास चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है। जानें 2 मार्च को होलिका दहन का 12 मिनट का श्रेष्ठ मुहूर्त और 3 मार्च को चंद्र ग्रहण व सूतक काल का समय।

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Feb 07, 2026
Holika Dahan 2026 Muhurat : होलिका दहन 2026 (फोटो सोर्स: AI image@Gemini)

Holika Dahan Muhurat2026 : इस वर्ष होली पर्व पर भद्रा और खग्रास चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसको लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति है। 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा, जबकि अगले दिन 3 मार्च को धुलेंडी के दिन खग्रास चंद्र ग्रहण रहेगा। ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाएगा, जिसमें शुभ कार्य और मंदिर दर्शन वर्जित माने जाते हैं। ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि होली का त्योहार 2 व 3 मार्च को मनाया जाएगा। पहले दिन यानी सोमवार 2 मार्च को होलिका दहन (Holika Dahan) होगा, जबकि मंगलवार यानी 3 मार्च को धुलंडी (Holi 2026 Date and Time)पर रंग खेला जाएगा। हालांकि इस बार होलिका दहन का समय 2 मार्च की शाम और अर्द्ध रात्रि में किया जाएगा, जिसमें भी 2 मार्च की शाम को सिर्फ 12 मिनट का ही समय मिलेगा, जबकि अर्द्ध रात्रि में 1 घंटे 10 मिनट का समय होलिका दहन के लिए मिल रहा है। खास बात यह भी है कि इस बार होली के दिन चंद्र ग्रहण भी रहेगा।

ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि 2 मार्च को शाम 5:55 बजे भद्रा काल प्रारंभ होगा, जो 3 मार्च सुबह 4:28 बजे तक रहेगा। इस वर्ष भद्रा भूलोक में और सिंह राशि में मानी जा रही है, इसलिए प्रदोष काल में होलिका पूजन और दहन शास्त्रसम्मत और श्रेष्ठ रहेगा। उन्होंने बताया कि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर होलिका पूजन का विशेष महत्व होता है। भद्रा काल में दान-पुण्य भी किया जा सकता है।

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इस बार होली चंद्र ग्रहण के साये में मनाई जाएगी। 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे चंद्र ग्रहण शुरू होगा और शाम 6:48 बजे समाप्त होगा। जयपुर में चंद्र उदय शाम 6:29 बजे और ग्रहण का समापन 6:48 बजे होगा, जिससे ग्रहण काल मात्र 18 मिनट का रहेगा। ग्रहण का सूतक मंगलवार सुबह 6:20 बजे से लागू होगा। ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में बनेगा और भारत में दिखाई देगा। चंद्र ग्रहण होने से होलिका दहन 2 मार्च को एक दिन पहले ही करना शुभ रहेगा। इस प्रकार, रंगों का त्योहार 3 मार्च को मनाया जाएगा।

होलिका दहन | Holika Dahan Muhurat

ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि फाल्गुनशुक्ल की प्रदोषव्यापिनी पूर्णिमा को भद्रा रहित में करना शास्त्रसम्मत बताया गया है। इस वर्ष फाल्गुनशुक्ल चतुर्दशी सोमवार, 02 मार्च 2026 को सायं 05:56 तक है जो कि अगले दिन मंगलवार, 03 मार्च 2026 को सायं 05:07 तक है। प्रदोषकाल में पूर्णिमा होने से दिनांक 02 मार्च 2026 (सोमवार) को ही होलिका दहन होगा। इस दिन भद्रा सायं 05:56 से अन्तरात्रि 05:28 तक भूमिलोक (नैऋत्यकोण अशुभ) की रहेगी, जो कि सर्वथा त्याज्य है।

यथा :- भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी (रक्षाबंधन) फाल्गुनी ऐलिकादहन) तथा। श्रावणी नृपतिं हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी ॥ - मुहूर्तचिन्तामणि

श्रेष्ठ मुहूर्त (प्रदोषकाल)

धर्मसिन्धु के प्रमाणानुसार दिनांक 02 मार्च 2026 सोमवार को सायं 06:24 से सायं 06:36 के मध्य प्रदोषकाल में होलिका दहन श्रेष्ठ होगा।
अन्य मुहूर्त :- भद्रा पुच्छ मध्यरात्रि 01:23 से 02:34 तक रहेगी, जिसमें परम्परा के अनुसार होलिका दहन किया जा सकता है, परन्तु भद्रा समाप्ति के बाद कदापि नहीं करें।

यदि भद्रा निशीथकाल से आगे तक रहे तो (भद्रा मुख को छोड़कर) होलिका दहन भद्रकाल (भद्रा पुच्छ या प्रदोष) में किया जाना चाहिए। 2 मार्च 2026 को, भद्रा और भद्रा पुच्छ ही निशीथकाल से आगे तक व्याप्त हैं। प्रदोष काल ही होलिका दहन हेतु श्रेष्ठ हैं।

होलिका दहन के लिए मिलेगा सिर्फ 12 मिनट का समय

ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि 2 मार्च को शाम 5:56 बजे पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी, जो की अगले दिन यानी 3 मार्च को शाम 5:07 बजे तक रहेगी, जबकि इस दौरान सूर्यास्त नहीं होगा। इसलिए प्रदोष काल भी लागू नहीं होगा। इस वजह से होलिका दहन 2 मार्च सोमवार को शाम 6:24 बजे से 6:36 बजे के बीच किया जाना श्रेष्ठ रहेगा, जबकि धुलंडी 3 मार्च मंगलवार को मनाई जाएगी। खास बात यह भी है कि चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर बाद 3:20 बजे शुरू हो जाएगा और ग्रहण का समापन शाम 6:48 बजे होगा।

धुलंडी पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव नहीं रहेगा, क्योंकि सिर्फ 18 मिनट ही ग्रहण का असर

होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा को भद्रा रहित करना शास्त्रों में बताया गया है। इस बार फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी सोमवार 2 मार्च को शाम 5:56 बजे से पूर्णिमा प्रारंभ हो जाएगी और अगले दिन 3 मार्च को शाम 5:08 बजे तक रहेगी। अत: प्रदोष काल में पूर्णिमा 2 मार्च को ही प्राप्त होने से होलिका पर्व 2 मार्च यानी सोमवार को ही मनाया जाएगा। इस दिन भद्रा शाम 5:56 बजे से अगले दिन मंगलवार सुबह 5:32 बजे तक रहेगी। इस बार 3 मार्च को उदय होता हुआ चंद्र ग्रहण भी दिखाई देगा, जिससे धुलंडी पर कोई असर पड़ेगा।

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