वहां उपस्थित पूजारी आपसे आपकी आधार कार्ड की मांग करेंगे।
नई दिल्ली। बात चाहे फोन के सिम लेने की हो या फिर पासपोर्ट बनवाना हो, आजकल हर छोटे से बड़े काम में आधार कार्ड की जरूरत हमें पड़ती है। बिना आधार कार्ड के तो किसी भी काम को सुचारू रूप से पूरा करना काफी मुश्किल है।
बात यदि शादी की करें तो मैरिज रजिस्ट्रेशन में भी आधार कार्ड का होना आवश्यक है लेकिन बात अगर मंदिर में भगवान के सामने विवाह की हो, तो उसमें भगवान की आर्शीवाद ही काफी है, उसी का होना आवश्यक है लेकिन इस सिलसिले में हम बता दें कि अब ईश्वर के आर्शीवाद के साथ जेब और पर्स में आधार कार्ड साथ रखकर ही जाएं वर्ना ऊपरवाला भी आपकी शादी नहीं करा सकता।
दरअसल देश में एक ऐसा ही मंदिर है जहां यदि आप विवाह के लिए जाएंगे तो सबसे पहले वहां उपस्थित पूजारी आपसे आपकी आधार कार्ड की मांग करेंगे। हम यहां बात कर रहे है उत्तराखंड के अल्मोड़ा में स्थित चितई गोलू देवता के प्रसिद्ध मंदिर के बारे में, जहां शादी करने के लिए अब आधार कार्ड का होना अनिवार्य है।
इस मंदिर में रोज़ाना लगभग छह शादियां होती है और इस हिसाब से प्रतिसाल यहां करीब 400 विवाह सम्पन्न करवाएं जो है, चूंकि यहां इतनी सारी शादियां होती है ऐसे में लड़के और लड़कियों के नाम और पता का जांच करना मुश्किल हो जाता है और ये जोड़े बालिग है या नाबालिग इसका पता लगाना भी कठिन हो जाता है।
पूजारियों का तो यहां तक कहना है कि यहां कई बार नाबालिग नेपाली लड़कियां विवाह के लिए आती है इसलिए नाबालिग विवाह को रोकने के लिए मंदिर के पुजारियों द्वारा इस कदम को उठाश गया है। यदि किसी जोड़े को इस मंदिर में शादी करनी है तो इसके लिए उसके आधार कार्ड या तो कोई भी पहचान पत्र का होना अनिवार्य है अन्यथा यहां विवाह के बारे में न ही सोचें तो बेहतर है।