
Kharmas 2026 End Date : शादी का सीजन 2026: अप्रैल से जुलाई तक कब-कब हैं शुभ मुहूर्त? पूरी सूची देखें (फोटो सोर्स: Gemini AI)
Kharmas 2026 End Date : 14 अप्रैल को सूर्य के राशि परिवर्तन के बाद से फिर शादियों का दौर शुरू हो जाएगा। खरमास खत्म होते ही विवाह, देव प्रतिष्ठा, नूतन गृह निर्माण, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य 14 अप्रैल के बाद शुरू हो गए हैं। ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि 15 मार्च से लगे खरमास की समाप्ति 14 अप्रेल को रही है। जिसके बाद मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाएंगे। सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास यानी मीन महीना खत्म हो गया है। इससे पहले 15 मार्च को सूर्य के मीन राशि में आने के बाद मीन मास चल रहा था। खरमास होने के कारण पिछले एक महीने से हर तरह के मांगलिक कामों पर रोक लगी हुई थी। लेकिन अब इनके लिए मुहूर्त रहेंगे।
ज्योतिष ग्रंथों में कहा गया है कि जब सूर्य मीन राशि में रहता है तब इन दिनों में किसी भी तरह के शुभ काम नहीं करने चाहिए। इस दौरान सिर्फ जप, तप और स्नान-दान करना चाहिए। खासकर 19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया का अबूझ मुहूर्त है, जिसमें बिना पंचांग देखे विवाह किए जा सकते हैं। मई का महीना भी शादियों के लिए काफी अच्छा रहने वाला है। इस दौरान गुरु और शुक्र की स्थिति अनुकूल रहने से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है।
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि 14 अप्रैल 2026 सेविवाह का मौसम पुनः शुरू हो जाएगा, जो चातुर्मास के प्रारंभ तक जारी रहेगा। चातुर्मास देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर देवउठनी एकादशी पर समाप्त होता है। देवउठनी एकादशी के अगले दिन तुलसी विवाह किया जाता है और इसके साथ ही शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं। देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 को और देवउठनी एकादशी 20 नवंबर 2026 को पड़ेगी। इसलिए, 25 जुलाई से 20 नवंबर 2026 के बीच कोई भी शुभ कार्य नहीं होंगे।
19 अप्रैल से 29 जून तक विवाह के लिए कुल 24 मुहूर्त हैं। अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन अबूझ मुहूर्त होने के कारण किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है।
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि 17 मई से 15 जून तक अधिक मास रहेगा, जिसके चलते करीब एक माह तक विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। इसी कारण अक्षय तृतीया से पहले और इसी दिन बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित किए जाएंगे। इन तीन माह में विवाह समारोहों की भरमार रहेगी।
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि खरमास यानी मीन मास खत्म हो जाने से 16 संस्कार और अन्य शुभ काम किए जा सकते हैं। शुभ मुहूर्त और शुभ दिन में अन्नप्राशन, नामकरण, चूड़ाकर्म, विद्यारंभ और अन्य शुभ काम किए जा सकते हैं। सूर्य के मेष राशि में आते ही गृह प्रवेश और विवाह के भी मुहूर्त रहेंगे। अब देवगुरु बृहस्पति भी खुद की राशि यानी मीन में आ गए हैं। जिससे हर मांगलिक कामों में गुरु का बल और बढ़ जाएगा।
14 अप्रैल को होने वाली मेष संक्रांति सिर्फ खगोलीय घटना नहीं है। यह नए मंगल कार्यों की शुरुआत का संकेत है। जैसे ही सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, मांगलिक कार्यों पर लगी रोक हट जाती है और विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण संस्कार जैसे आयोजनों की शुरुआत फिर से हो सकती है। आप भी लंबे समय से इंतजार कर रहे थे तो अब समय आ गया है कि आप भी इन तिथियों में अपना मांगलिक कार्य संपन्न कर सकते हैं।
विवाह और सगाई जैसे मांगलिक कार्यों के लिए अबूझ मुहूर्त को शुभ माना जाता है। अगर किसी के विवाह की तारीख नहीं निकल पा रही है या फिर किसी कारण से शुभ मुहूर्त वाले दिन विवाह करना संभव ना हो तो अबूझ मुहूर्त में भी विवाह किया जा सकता है। धर्मग्रंथों के अनुसार अक्षय तृतीया, बसंत पंचमी और देव प्रबोधिनी एकादशी को अबूझ मुहूर्त माना गया है।
सनातन धर्म दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक है, जो कई प्रकार की परंपराओं और मान्यताओं से समृद्ध है। इस परंपरा में से एक शुभ विवाह भी है, यह जीवन का सबसे खुशनुमा पल होता है। विवाह कई तरह से किए जाते हैं, प्रत्येक के अपने-अपने रीति-रिवाज और महत्व होते हैं। हिंदू धर्म में यह 16 संस्कारो मे से एक होता है और इसके बगैर कोई भी व्यक्ति ग्रहस्थाश्रम में प्रवेश नहीं कर सकता है। इसलिए हमारे शास्त्रों में विवाह को सबसे महत्वपूर्ण और कल्याणकारी माना जाता है।
Updated on:
06 Apr 2026 05:45 pm
Published on:
06 Apr 2026 05:45 pm
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