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Narad Jayanti 2026 Date: नारद मुनि जयंती 2026 कब है? तिथि, पूजा, मंत्र और लाभ की पूरी जानकारी

Narad Jayanti 2026 Date: नारद जयंती 2026 कब है? जानें ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया की तिथि, पूजा विधि, मंत्र, कथा और महत्व। क्यों देवर्षि नारद को पहला पत्रकार माना जाता है और इस दिन पूजा करने से क्या लाभ मिलते हैं।

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May 01, 2026
Narad Jayanti 2026 Date : नारद जयंती 2026: कब है, क्यों मनाई जाती है, पूजा विधि, कथा और महत्व (फोटो सोर्स: AI@Gemini)

Narad Jayanti 2026 Date: आप दुनिया का पहला पत्रकार किसे कहेंगे? गूगल या एआई को नहीं, बल्कि देवर्षि नारद को जो नारायण-नारायण का जाप करते हुए तीनों लोकों की खबर पलक झपकते ही इधर से उधर पहुंचा देते थे। 3 मई 2026 को पूरा देश इन्हीं बुद्धि के प्रतीक नारद मुनि की जयंती मनाने जा रहा है।

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Narad Jayanti 2026 date and time : कब और क्यों मनाई जाती है नारद जयंती?

हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को नारद जयंती मनाई जाती है। साल 2026 में तिथियों का गणित कुछ ऐसा है:

द्वितीया तिथि शुरू: 2 मई को रात 12:51 बजे।
द्वितीया तिथि समाप्त: 3 मई को सुबह 03:02 बजे।
उदया तिथि: 3 मई को सूर्योदय के समय यह तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए नारद जयंती 3 मई (रविवार) को ही धूमधाम से मनाई जाएगी।

गंधर्व से दासी पुत्र बनने की दिलचस्प कहानी कथा

नारद मुनि हमेशा से ऋषि नहीं थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार, अपने पिछले जन्म में वे उपभ्र नाम के एक बेहद सुंदर गंधर्व थे। रूप और गायन की कला का उन्हें इतना घमंड हो गया कि एक बार भगवान ब्रह्मा के सामने अप्सराओं के नृत्य के दौरान उन्होंने मर्यादा लांघ दी।

ब्रह्मा जी क्रोधित हो गए और उन्हें श्राप दिया कि वे अगले जन्म में एक 'शूद्र' के घर पैदा होंगे। यही वह मोड़ था जहाँ एक अहंकारी गंधर्व, भक्ति के मार्ग पर चल पड़ा। एक दासी पुत्र के रूप में उन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान विष्णु की सेवा में लगा दिया। उनकी कठोर तपस्या से खुश होकर आकाशवाणी हुई कि इस जन्म में तो नहीं, लेकिन अगले जन्म में वे ब्रह्मा के मानस पुत्र बनेंगे। और वही दासी पुत्र आगे चलकर देवर्षि नारद कहलाए।

पत्रकारिता और नारद मुनि का अनूठा रिश्ता

आज के दौर में नारद मुनि को आदि पत्रकार माना जाता है। उनके पास कुछ ऐसी खूबियां थीं जो आज के मीडिया के लिए सीख हैं:

लोक कल्याण का लक्ष्य: नारद मुनि खबरें फैलाते जरूर थे, लेकिन उनका अंतिम उद्देश्य हमेशा लोक कल्याण (सबका भला) होता था।

तटस्थता: वे देवताओं और असुरों, दोनों के बीच समान रूप से लोकप्रिय थे। वे किसी एक पक्ष के नहीं, बल्कि सत्य के पक्षधर थे।

संगीत के जनक: क्या आप जानते हैं कि नारद मुनि को संगीत का भी देवता माना जाता है? उनके हाथ में दिखने वाली वीणा ज्ञान और कला का संगम है।

कैसे करें पूजा और क्या होगा लाभ?

3 मई को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु के साथ नारद मुनि की पूजा करें।

मंत्र: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय और नारायण-नारायण का जाप करें।

दान: इस दिन अन्न और जल का दान करना बेहद शुभ माना जाता है।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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Published on:
01 May 2026 11:05 am
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