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Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी 2026 कब है? निर्जला व्रत से मिलता है 24 एकादशियों का फल

Nirjala Ekadashi 2026 Date Time : निर्जला एकादशी 2026 कब है? जानें व्रत की सही तारीख, पारण समय, पूजा विधि और बिना पानी उपवास के फायदे। एक व्रत से 24 एकादशी का पुण्य कैसे मिलता है, पूरी जानकारी पढ़ें।

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Apr 27, 2026
Nirjala Ekadashi 2026 Kab Hai : निर्जला एकादशी 2026: तारीख, पारण समय, व्रत विधि और फायदे (फोटो सोर्स: AI@Gemini)

Nirjala Ekadashi 2026 Kab Hai: हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत मन, शरीर और आत्मा को ताजगी देने वाला माना गया है। पूरे साल में कुल 24 एकादशी आती हैं, लेकिन निर्जला एकादशी को सबमें सबसे खास मानते हैं। ये व्रत बाकी एकादशियों से ज्यादा कठिन है और पुण्य भी सबसे ज्यादा मिलता है।

अगर आप हर एकादशी का व्रत नहीं रख पाते, तो बस निर्जला एकादशी कर लें कहते हैं कि पूरे साल की एकादशियों जितना पुण्य मिलता है। अब जानते हैं इस व्रत की खासियत और 2026 में इसका सही समय क्या है।

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निर्जला एकादशी का मतलब

नाम खुद ही साफ है “निर्जला” यानी बिना पानी के। बाकी एकादशियों में आप पानी या फल ले सकते हैं, मगर इस दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक पूरा उपवास चलता है, न खाना न पानी। ये व्रत ज्येष्ठ महीने की तपती गर्मी में आता है, जब बिना पानी के रहना असली परीक्षा लगती है ये संयम, आस्था और शरीर की परीक्षा है।

2026 में कब है निर्जला एकादशी

इस साल यह व्रत भीषण गर्मी के बीच गुरुवार, 25 जून 2026 को रखा जाएगा।
एकादशी तिथि शुरू: 24 जून 2026, सुबह 08:42 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त: 25 जून 2026, सुबह 10:39 बजे तक
व्रत खोलने (पारण) का समय: 26 जून 2026, सुबह 05:38 से 08:43 के बीच।
विशेष नोट: व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अनिवार्य है। 26 जून को द्वादशी दोपहर 12:52 पर समाप्त होगी।

उपवास से सेहत को क्या फायदा?

रिलीजन के साथ-साथ, निर्जला एकादशी के पीछे साइंस भी है

बॉडी डिटॉक्स: 24 घंटे बिना कुछ खाए-पिए रहने से शरीर को रीसेट करने का मौका मिलता है। पाचन तंत्र को आराम, जहरीले तत्व बाहर जिसे आजकल डिटॉक्स बोलते हैं।

मानसिक मजबूती: जब इंसान खुद को कंट्रोल करता है तो उसकी इच्छा-शक्ति तेज हो जाती है।

जल के महत्व की याद: इतनी भीषण गर्मी में बिना पानी के रहना हमें दिखाता है, पानी की एक-एक बूंद कितनी कीमती है।

पूजा कैसे करें? आसान स्टेप्स

  • सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और पीले रंग के साफ कपड़े पहनें (पीला रंग भगवान विष्णु को पसंद है)।
  • हाथ में थोड़ा सा पानी लेकर व्रत का संकल्प लें। (सिर्फ कुल्ला या आचमन के लिए पानी की इजाजत है।)
  • भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने दीपक जलाएं, पीले फूल, तुलसी और फल चढ़ाएं।
  • मन ही मन पूरे दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
  • जितना बन सके, प्यासे को पानी पिलाएं, मटका, पंखा या फल दान करें ये सबसे शुभ माना गया है।
  • अगले दिन सूर्योदय के बाद किसी ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराएं, फिर खुद व्रत खोलें।

अंत में निर्जला एकादशी सिर्फ खाने-पीने से दूर रहने का दिन नहीं है। ये खुद को ईश्वर के सामने समर्पित करने का तरीका है, जो इंसान की गलतियों को मिटाता है, जीवन में सुख-शांति लाता है और मोक्ष का रास्ता खोलता है।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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Published on:
27 Apr 2026 06:37 pm
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