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अधिक मास (Malmas 2026) में करें पितृ दोष निवारण: जानिए कैसे पिंडदान और श्राद्ध से मिलेगी पितरों की कृपा और दोष से मुक्ति

Malmas 2026 Pitra Dosh Upay: साल 2026 का मलमास, जिसे अधिकमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, 17 मई से 15 जून तक रहेगा। यह समय भगवान विष्णु को समर्पित होता है और पितरों की शांति तथा पितृ दोष निवारण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान किए गए श्राद्ध, पिंडदान और दान-पुण्य कई गुना फल देते हैं।

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भारत

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MEGHA ROY

Apr 27, 2026

Pitra Shanti Upay

Pitra dosh nivaran ke upay in hind|Chatgpt

Malmas 2026 Pitra Dosh Upay : साल 2026 का मलमास, जिसे अधिकमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इस दौरान पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध जैसे कर्मों का विशेष महत्व होता है, जिससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, इन कर्मों से न केवल पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है, बल्कि जीवन में आ रही बाधाएं भी दूर हो सकती हैं। मान्यता है कि पितृ प्रसन्न होकर अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। ऐसे में अधिक मास पितृ दोष निवारण और आध्यात्मिक उन्नति के लिए एक उत्तम अवसर माना जाता है।

मलमास में संकल्प और श्रद्धा का महत्व

श्राद्ध करते समय हाथ में जल लेकर संकल्प लेना जरूरी है। मन में यह भावना रखें कि यह कार्य पितरों की तृप्ति और मोक्ष के लिए किया जा रहा है। केवल विधि ही नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा ही इसे सफल बनाती है।

मलमास में श्राद्ध और भोजन की विधि

इस पवित्र माह में पितरों के लिए सात्विक भोजन बनाना चाहिए। इसमें गेहूं, चावल, मूंग, जौ, तिल, घी और मौसमी फल-सब्जियां शामिल करें। भोजन बनाते समय स्वच्छता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखें। भोजन का एक भाग पंचबलि के रूप में गाय, कुत्ते, कौए और चींटियों के लिए निकालना चाहिए। इसके बाद किसी योग्य ब्राह्मण को भोजन कराना और कच्चा राशन दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

पितृ दोष निवारण के सरल उपाय

  • श्रीमद्भगवद्गीता का नियमित पाठ करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का जप करें।
  • भगवान विष्णु के मंदिर में दीपदान करें या पीपल/बरगद के नीचे दीप जलाएं।

पितरों तक कैसे पहुंचता है श्राद्ध का अर्पण

धार्मिक ग्रंथ गरुड़ पुराण में बताया गया है कि श्राद्ध में अर्पित भोजन सीधे पितरों तक पहुंचता है। इसमें “विश्वदेव” और “अग्निश्रवा” नामक दिव्य शक्तियाँ माध्यम बनती हैं। पितर जिस योनि में होते हैं, उसी अनुसार उन्हें भोजन प्राप्त होता है देव योनि में अमृत, मनुष्य योनि में अन्न, पशु योनि में घास, और अन्य योनियों में भिन्न रूपों में।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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