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Vaishakh Amavasya 2026: पितृ दोष से मुक्ति का दिन या संकट का कारण? भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां, वरना पड़ सकता है भारी असर

Vaishakh Amavasya Kab Hai 2026: वैशाख अमावस्या को ज्योतिष में एक गहरे आत्मिक अनुभव का दिन माना जाता है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में होते हैं, जिससे मन की स्थिरता और भीतर की भावनाएं अधिक प्रभावी हो जाती हैं।कई लोग इसे पितरों के प्रति कृतज्ञता जताने का विशेष अवसर मानते हैं।

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भारत

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MEGHA ROY

Apr 15, 2026

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Vaishakh Amavasya 2026: सुबह का समय था, हल्की गर्म हवा चल रही थी और लोग अपने-अपने काम में लगे थे लेकिन ज्योतिष के जानकारों के अनुसार 17 अप्रैल 2026 का दिन साधारण नहीं है. इस दिन पड़ रही वैशाख अमावस्या सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि ग्रहों की विशेष स्थिति का संकेत है. कहा जाता है कि इस दिन सूर्य और चंद्रमा का मिलन हमारे जीवन की ऊर्जा को भीतर की ओर मोड़ देता है. ऐसे में पितरों से जुड़ी ऊर्जा भी सक्रिय होती है. यही वजह है कि इस दिन किए गए कर्मों का प्रभाव सामान्य दिनों से कहीं ज्यादा गहरा होता है. अगर आप भी जानना चाहते हैं कि इस दिन किस तरह के काम आपके भाग्य को बदल सकते हैं और किन चीजों से बचना चाहिए, तो यह लेख आपके लिए है.

Vaishakh Amavasya 2026 Date: तिथि और शुभ समय

इस वर्ष अमावस्या तिथि 16 अप्रैल 2026 की रात 08:14 बजे शुरू होकर 17 अप्रैल 2026 की शाम 05:23 बजे समाप्त होगी। इस दौरान किया गया तर्पण, दान और ध्यान अधिक फलदायी माना जाता है। सुबह का समय, विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त, मन को शांत और केंद्रित करने के लिए सबसे अच्छा होता है।

क्या न करें: इन बातों का रखें ध्यान

नए कार्यों की शुरुआत से बचें

इस दिन विवाह, गृह प्रवेश या नया काम शुरू करना टालना बेहतर माना जाता है।

तामसिक भोजन से दूरी रखें

मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे भोजन से बचकर सात्विक आहार अपनाना मन को शांत रखता है।

नकारात्मकता से दूर रहें

झगड़ा, विवाद या किसी का अपमान करने से दिन की सकारात्मकता कम हो सकती है।

देर तक सोने से बचें

सुबह जल्दी उठना और दिनभर सक्रिय रहना शरीर और मन के संतुलन के लिए अच्छा माना जाता है।

क्या करें: सरल उपाय, गहरा प्रभाव

पवित्र स्नान से शुरुआत करें

दिन की शुरुआत जल्दी उठकर स्नान से करें। पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाने से मानसिक शुद्धि का अनुभव होता है और दिन सकारात्मक ऊर्जा के साथ शुरू होता है।

पितृ तर्पण का महत्व समझें

काले तिल और जल से तर्पण करना पितरों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि इससे जीवन में आ रही रुकावटें धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।

पीपल की पूजा करें

पीपल के पेड़ को जल चढ़ाना और शाम को दीप जलाना शांति और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। यह मन को स्थिर रखने में भी मदद करता है।

दान और सेवा करें

सत्तू, पानी, घड़ा, पंखा या छाता दान करना इस मौसम में बेहद उपयोगी होता है। इसके साथ ही पशु-पक्षियों को भोजन और पानी देना भी सकारात्मक भावनाओं को बढ़ाता है।