
Pradosh Vrat Kab Hai : ओम नमः शिवाय! अगर आप भगवान शिव के भक्त हैं, तो 15 अप्रैल 2026 का दिन आपके लिए बेहद खास रहने वाला है। इस दिन एक नहीं, बल्कि दो बड़े व्रत प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि एक साथ पड़ रहे हैं। ऐसे दुर्लभ संयोग कम ही देखने को मिलते हैं, इसलिए इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं इस दिन का पूरा महत्व, शुभ-अशुभ समय और क्या करना चाहिए, क्या नहीं।
वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 14 अप्रैल की रात 12:13 से शुरू होकर 15 अप्रैल की रात 10:31 तक रहेगी। इसी कारण प्रदोष व्रत 15 अप्रैल (बुधवार) को रखा जाएगा। खास बात यह है कि इसी दिन मासिक शिवरात्रि भी है। यानी एक ही दिन भगवान शिव की विशेष पूजा का डबल लाभ मिलेगा। मान्यता है कि प्रदोष व्रत करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और शिव कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
(वीडियो सोर्स : Kitcat Stories)
| समय/काल | अवधि (टाइम) | विवरण |
|---|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 4:33 – 5:21 | अत्यंत शुभ समय |
| सूर्योदय | सुबह 6:10 | दिन की शुरुआत |
| सूर्यास्त | शाम 6:43 | दिन का अंत |
| प्रदोष काल | शाम 5:58 – 7:28 | सबसे महत्वपूर्ण पूजा समय |
| अमृत काल | सुबह 7:35 – 9:09 | शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ |
| राहु काल | दोपहर 12:00 – 1:30 | अशुभ समय (परहेज करें) |
प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा प्रदोष काल में ही करनी चाहिए।
प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा बहुत सरल तरीके से भी की जा सकती है:
यदि सभी पहरों में पूजा संभव न हो, तो कम से कम पहला और अंतिम पहर जरूर करें।
बिल्कुल समय न मिले तो निशिता काल (11:59 – 12:43) में पूजा करें।
इस बार भद्रा का प्रभाव भी देखने को मिलेगा:
भद्राकाल शुरू: 15 अप्रैल रात 10:31
समाप्ति: 16 अप्रैल सुबह 9:25
खास बात: इस बार भद्रा का वास मृत्युलोक में रहेगा, इसलिए इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करना अशुभ माना जाता है।
16 अप्रैल (गुरुवार) को:
सूर्योदय: सुबह 6:09
व्रत खोलने का समय: सुबह 6:10 से 8:40
इसी समय प्रदोष और शिवरात्रि दोनों व्रतों का पारण करना शुभ रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब प्रदोष व्रत और शिवरात्रि एक साथ पड़ते हैं, तो यह महाशुभ योग बनता है। इससे:
कुल मिलाकर, 15 अप्रैल का दिन भगवान शिव की भक्ति और साधना के लिए बेहद खास है। अगर आप पूरे विधि-विधान से व्रत रखते हैं, तो यह दिन आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि ला सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।