Varuthini Ekadashi 2026: वरुथिनी एकादशी का पर्व भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। वर्ष 2026 में यह एकादशी 13 अप्रैल को पड़ रही है और इस बार इसका महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि इस दिन कई दुर्लभ ग्रह योग बन रहे हैं। ज्योतिष के अनुसार, यह संयोग जीवन में नए अवसर, आत्मिक विकास और सतर्कता तीनों का मिश्रण लेकर आएगा।
Varuthini Ekadashi 2026 Date: वरुथिनी एकादशी का पर्व भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। वर्ष 2026 में यह एकादशी 13 अप्रैल, सोमवार को पड़ रही है। इस बार यह दिन ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास और प्रभावशाली माना जा रहा है, क्योंकि ग्रहों की स्थिति एक दुर्लभ संयोग बना रही है। सूर्य, बुध, मंगल और शनि का मीन राशि में एक साथ आना जीवन में बड़े बदलाव के संकेत दे रहा है। चंद्रमा और गुरु की स्थिति भी नए अवसर और तरक्की के द्वार खोल सकती है। हालांकि राहु और राज पंचक के प्रभाव के कारण हर कदम सोच-समझकर उठाने की जरूरत होगी, इसलिए यह एकादशी जहां लाभ और प्रगति के योग बना रही है, वहीं संयम बरतने की भी सलाह दे रही है।
इस दिन चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित होंगे और मिथुन राशि में विराजमान गुरु की उन पर दृष्टि रहेगी। यह योग व्यक्ति के विचारों को स्पष्टता देता है और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत बनाता है। ऐसे समय में मन अपेक्षाकृत शांत रहता है और व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी समझदारी से काम ले पाता है। यह संयोग आध्यात्मिक झुकाव भी बढ़ाता है, जिससे व्यक्ति भक्ति और आत्मचिंतन की ओर आकर्षित होता है।
वरुथिनी एकादशी के दिन सूर्य, बुध, मंगल और शनि जैसे प्रमुख ग्रह मीन राशि में एकत्र रहेंगे। मीन राशि को आध्यात्मिकता और आंतरिक शांति का प्रतीक माना जाता है। इतने ग्रहों का एक साथ होना व्यक्ति को भीतर की ओर देखने और खुद को समझने का अवसर देता है। हालांकि बुध की स्थिति थोड़ी कमजोर मानी जा रही है, फिर भी अन्य ग्रहों का सहयोग इस समय को आत्मविकास के लिए अनुकूल बनाता है।
जहां एक ओर शुभ योग बन रहे हैं, वहीं राहु और राज पंचक की उपस्थिति यह संकेत देती है कि हर निर्णय सोच-समझकर लेना जरूरी है। जल्दबाजी या भावनाओं में आकर लिया गया फैसला नुकसान दे सकता है। इसलिए इस समय धैर्य और विवेक सबसे बड़ी ताकत होंगे।