धर्म और अध्यात्म

Vat Savitri Significance: सुहागिन महिलाएं जानें वट वृक्ष की परिक्रमा में क्यों लपेटा जाता है 7, 21 या 108 बार कच्चा सूत और क्या है इसका रहस्य

Vat Vriksh Upay: मान्यता है कि वट सावित्री के दिन वट वृक्ष की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि वट वृक्ष पर कच्चा सूत कितनी बार और क्यों लपेटा जाता है..
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Apr 25, 2026
Vat Vriksh Upay,Vat Savitri Vrat 2026 Date And Muhurat
Vat savitri vrat me kaccha soot kitni baar lapetna chahiye| Chatgyt

Vat Savitri Vrat 2026: 2026 में वट सावित्री व्रत 16 मई, शनिवार को मनाया जाएगा, जिससे शनि देव की कृपा का विशेष संयोग बनेगा। हिंदू धर्म में इस व्रत का खास महत्व है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए व्रत रखती हैं। वट सावित्री व्रत पर बरगद के पेड़ की पूजा करने और उस पर कच्चा सूत लपेटने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि इस व्रत से वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है और सभी बाधाएं दूर होती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वट वृक्ष की परिक्रमा करते समय 7, 21 या 108 बार कच्चा सूत लपेटने के पीछे क्या खास कारण और महत्व है…

Vat Savitri Vrat 2026 Date And Muhurat: वट सावित्री व्रत का कब है?

2026 में यह व्रत 16 मई, शनिवार को है; अमावस्या 16 मई सुबह 05:11 से 17 मई रात 01:30 तक रहेगी। पूजा का शुभ समय 07:15 से 10:45 और अभिजीत मुहूर्त 11:50 से 12:45 बजे तक है, जबकि राहुकाल में पूजा से बचना चाहिए।

वट वृक्ष की पूजा क्यों है खास

Hindu vrat vat savitri|Gemini

वट वृक्ष को त्रिदेवों का स्वरूप माना जाता है। इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास बताया गया है। यही कारण है कि इसकी पूजा करने से एक साथ तीनों देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। इसके अलावा, वृक्ष की लटकती जटाओं को देवी सावित्री का प्रतीक माना जाता है। जब महिलाएं श्रद्धा से इसकी पूजा करती हैं, तो यह उनके जीवन में स्थिरता, समृद्धि और सुरक्षा का संकेत देता है।

कच्चा सूत 7, 21 या 108 बार क्यों लपेटते हैं

वट सावित्री व्रत के दौरान कच्चा सूत लपेटने की परंपरा का भी खास महत्व है। आमतौर पर महिलाएं 7 बार सूत लपेटती हैं, जो सात जन्मों के अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। कुछ महिलाएं 21 या 108 बार भी परिक्रमा करती हैं। ये संख्याएं धार्मिक दृष्टि से शुभ मानी जाती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का संकेत देती हैं। यह प्रक्रिया केवल एक रिवाज नहीं, बल्कि विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है।

पूजा और परिक्रमा के लाभ

श्रद्धा और विश्वास के साथ वट वृक्ष की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और विश्वास बढ़ता है। ऐसा माना जाता है कि इससे पति की आयु लंबी होती है और परिवार पर आने वाले संकट दूर होते हैं।

Published on:
25 Apr 2026 02:58 pm