ज्योतिष शास्त्र में हर ग्रह का एक खास प्रभाव बताया गया है। जहां मंगल को उग्र और शनि को क्रूर ग्रह की संज्ञा दी जाती है। ऐसे में आपकी कुछ गलत आदतें इन ग्रहों से जुड़े अशुभ प्रभाव पैदा कर सकती हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जातक की कुंडली में मौजूद नवग्रहों का उसके जीवन पर प्रभाव पड़ता है। इन ग्रहों में से मंगल को ग्रहों का सेनापति और शनि को एक क्रूर ग्रह माना जाता है। मान्यता है कि कुंडली में यदि ये दोनों ग्रह शुभ स्थिति में हों तो जातक के जीवन में सुखों की कमी नहीं होती। वहीं इन ग्रहों के दोष से पीड़ित व्यक्ति को जीवन में कई शारीरिक और मानसिक कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। शास्त्रानुसार शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। ऐसे में आपके द्वारा की जाने वाली गलतियां ही कुंडली में मंगल और शनि दोष का कारण बन सकती हैं। तो आइए जानते हैं उन गलतियों के बारे में जिनसे मंगल और शनि देव हो सकते हैं नाराज...
मंगल दोष के कारण-
गलत संगत में पड़ना
अत्यधिक क्रोध करना और चिड़चिड़ापन
नशे की लत
अहंकार के वशीभूत होना
दूसरों का अपमान करना
घर के पश्चिमी कोण में साफ सफाई ना होना
शनि दोष के कारण-
पशु-पक्षियों को परेशान करना
पैसों के बल पर दूसरों का अहित करना
दुर्बल लोगों को सताना
लालच में पड़ना
नियमों का उल्लंघन करना
मंगल दोष के उपाय
ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक मंगल दोष से मुक्ति पाने के लिए हर मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमान जी को केसरिया चोला चढ़ाएं। इसके अलावा लाल मसूर का दाल भी शुभ माना जाता है।
शनि दोष के उपाय
शनिवार के दिन काले कपड़े, जूते-चप्पल, लोहे की चीजें या सरसों के तेल का दान करने से शनि दोष से मुक्ति मिलने की मान्यता है। इसके अलावा शनिवार के दिन सुबह पीपल के पेड़ की जड़ में पानी देने और शाम के समय पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से भी शनिदेव प्रसन्न होते हैं।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। patrika.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह ले लें।)
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